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ललित सुरजन की कलम से संसाधनों का राष्ट्रीयकरण!

'नेहरू सरकार के सामने बड़ी चुनौती थी कि प्राथमिक क्षेत्र या कि बुनियादी उद्योग कैसे स्थापित किए जाएं।

ललित सुरजन की कलम से संसाधनों का राष्ट्रीयकरण!
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'नेहरू सरकार के सामने बड़ी चुनौती थी कि प्राथमिक क्षेत्र या कि बुनियादी उद्योग कैसे स्थापित किए जाएं। देश को पेट्रोलियम, इस्पात, बिजली इन सबकी जरूरत थी, क्योंकि औद्योगिक विकास व आर्थिक प्रगति की नींव इन्हीं से रखी जा सकती थी। सरकार ने इंग्लैंड व अन्य पश्चिमी देशों से इसमें सहायता मांगी, लेकिन उन्होंने कोई खास उत्साह नहीं दिखाया। देश में तेल भंडारों के अन्वेषण के लिए आई पश्चिमी कंपनियों ने तो साफ-साफ कह दिया कि भारत में तेल है ही नहीं। यही वह समय था जब भारत और तत्कालीन सोवियत संघ के बीच सुदृढ़ मैत्री संबंधों की शुरुआत हुई। सोवियत संघ व कम्युनिस्ट ब्लॉक के अन्य देशों इस्पात, तेल, बिजली, इंस्ट्रुमेंटेशन जैसे उपक्रम स्थापित करने के लिए दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाया।'

(देशबन्धु में 08 नवम्बर को प्रकाशित)

https://lalitsurjan.blogspot.com/2012/11/blog-post.html


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