ललित सुरजन की कलम से एकालाप बनाम संवाद
मुझे प्रधानमंत्री जो अपने मन की बात करते हैं उसे लेकर कुछ अधिक शंका होती है।

'मुझे प्रधानमंत्री जो अपने मन की बात करते हैं उसे लेकर कुछ अधिक शंका होती है। यह तो जनता पिछले कई वर्षों से देख रही है कि नरेन्द्र मोदी को भाषण देना अतिप्रिय है। वे एक सधे हुए अभिनेता की भांति स्वराघातों व भाव मुद्राओं का प्रयोग कर जब कोई बात करते हैं तो श्रोताओं से एक बड़े वर्ग को अपने साथ बहाकर ले जाते हैं। लेकिन यह आश्चर्य की बात है कि उन्हें जनता के साथ संवाद याने दोतरफा बातचीत करते हुए लगभग नहीं के बराबर देखा गया है। वे जब आमसभाएं करते हैं तब श्रोताओं से अपनी बात के समर्थन में हुंकारा भरवाते हैं, किन्तु याद नहीं आता कि उन्होंने आमने-सामने कभी लोगों से बातचीत की हो। इसका यह अर्थ होता है कि जनता क्या सोच रही है इसे वे अपने प्रत्यक्ष अनुभव से नहीं जान पाते। उनके गुप्तचर जो सूचनाएं देते हैं उनके आधार पर ही वे अपने एकालाप की तैयारी करते होंगे।'
(देशबन्धु में 17 सितम्बर 2015 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2015/09/blog-post_16.html


