ललित सुरजन की कलम से मोदी : हवा में तलवारबाजी
भाजपा के एक वर्ग ने की है और इसमें उसे उद्योग जगत, मीडिया तथा कथित विचार समूहों या थिंक टैंक्स के एक हिस्से का समर्थन मिल रहा है।

'2014 के आम चुनाव के पहले एक बार फिर देश में राष्ट्रपति शासन प्रणाली लागू करने की कोशिश की जा रही है, प्रत्यक्ष नहीं तो प्रच्छन्न ही सही। इस उद्यम की पहल भाजपा के एक वर्ग ने की है और इसमें उसे उद्योग जगत, मीडिया तथा कथित विचार समूहों या थिंक टैंक्स के एक हिस्से का समर्थन मिल रहा है। लगभग दो साल पहले इस अभियान की शुरुआत हुई, अब धीरे-धीरे उसकी तस्वीर जनता के सामने खुल रही है। कहने की आवश्यकता नहीं है कि यह समूचा अभियान गुजरात के विवादास्पद मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को केंद्र में रखकर संचालित किया जा रहा है। इसमें पहली बार यह अनुमान भी हो रहा है कि जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 50 साल से भाजपा की राजनीति को संचालित करते आया है, वह भी एक व्यक्ति के सामने कमजोर पड़ गया है। जिस संगठन में एकचालकानुवर्ती का सिध्दांत सर्वोपरि हो, जिसकी अवज्ञा अटल बिहारी वाजपेयी जैसा लोकप्रिय नेता भी न कर पाया हो, जिसके सामने लालकृष्ण आडवानी की न चली हो, वह संगठन आज सत्ता का एक समानांतर केंद्र स्थापित करने के लिए तत्पर हो जाए, इसके पीछे कौन सी रणनीति या कौन सी विवशता है, कह पाना मुश्किल है।'
(देशबन्धु में 25 जुलाई 2013 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2012/05/3_8207.html


