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मोदी ओवैसी का हिन्दू मुस्लिम खेल धर्मनिरपेक्ष दलों को खत्म करने के लिए

इस राजनीति को ओवैसी नहीं रोक पाएंगे। इसे देश का सबसे बड़ा विपक्षी दल कांग्रेस ही रोक पाएगा और कांग्रेस कभी भी किसी एक धर्म की जाति की पार्टी नहीं हो सकती।

मोदी ओवैसी का हिन्दू मुस्लिम खेल धर्मनिरपेक्ष दलों को खत्म करने के लिए
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— शकील अख्तर

इस राजनीति को ओवैसी नहीं रोक पाएंगे। इसे देश का सबसे बड़ा विपक्षी दल कांग्रेस ही रोक पाएगा और कांग्रेस कभी भी किसी एक धर्म की जाति की पार्टी नहीं हो सकती। आजादी के आंदोलन से निकली पार्टी है उसे चाहे जितना संघर्ष करना पड़े वह जात-पात से ऊपर उठी पार्टी ही बनी रहेगी। जिसे आजकल की भाषा में कहते हैं डीएनए, वह ही ऐसा है कि कोई चाहे तो भी पार्टी का स्वभाव बदल नहीं सकता।

बिहार विधानसभा के बाद महाराष्ट्र स्थानीय निकायों के चुनाव खतरे की आखिरी घंटी है। अगर मुस्लिम नहीं समझे तो बंगाल में जिसे वे अपना कायद (नेता) मान रहे हैं उन ओवैसी की सरकार तो नहीं बन पाएगी मगर एक धर्मनिरपेक्ष सरकार जरूर खतरे में पड़ जाएगी और बीजेपी की सीटें वहां बढ़ जाएंगी। बिहार में भी बढ़ीं महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय के चुनावों में भी बढ़ीं। और दोनों जगह नुकसान धर्मनिरपेक्ष पार्टियों का हुआ।

देश में धर्मनिरपेक्ष राजनीति की जरूरत हिन्दू को भी है मुस्लिम को भी। मगर किसी भी देश में वह अल्पसंख्यक को ज्यादा होती है। भारत में मुस्लिम को ज्यादा है। बांग्लादेश में हिन्दू को। पाकिस्तान में जो मुस्लिम-हिन्दू राजनीति वजह से बरबाद हो गया वहां दोनों को। क्योंकि एक हद के बाहर यह धर्म की राजनीति दोनों को मारने लगती है और फिर बहुसंख्यक को ज्यादा। पाकिस्तान में यही होने लगा है। अल्पसंख्यक को जितना नुकसान होना था हो चुका है। अब बहुसंख्यक मुस्लिम ही मजहब की राजनीति का नुकसान उठा रहा है। तरक्की की दौड़ में पिछड़ कर।

पाकिस्तान जैसी स्थिति से बचने के लिए हिन्दुओं का बड़ा वर्ग सचेत है। प्रधानमंत्री मोदी का वोट 37 प्रतिशत से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। उसे पचास से ऊपर ले जाने के लिए उन्हें हिन्दुओं को और उग्र करने की जरूरत है। जो वे अपने तमाम शमशान, कब्रिस्तान, होली, दीवाली, ईद, मंगल सूत्र छीन लेंगे, यहां तक कि लड़की उठा ले जाएंगे जैसे भाषणों के बाद भी हासिल नहीं कर पा रहे हैं। अब उसके लिए उन्होंने एक नया तरीका ढूंढा है। मुस्लिमों के धु्रवीकरण का। मुस्लिम अगर एक झंडे के नीचे दिखेंगे तो हिन्दुओं को यह बताने में आसानी होगी कि देखो वे एक साथ हैं तुम भी एक साथ आओ।

अपने दम पर भीड़ इक_ी करने की एक सीमा होती है। मोदी उस सीमा तक पहुंच चुके हैं। अब उससे आगे लोगों को इक_ा करने के लिए उन्हें डर दिखाने की जरूरत है। वह देखो सब ओवैसी के साथ जा रहे हैं। तुम मेरे साथ आओ। हिन्दू राजनीति मुस्लिम राजनीति। धर्मनिरपेक्ष दलों को खत्म करने की साजिश। बीजेपी हिन्दू पार्टी बन सकती है। बन ही गई है। केन्द्र सरकार से जो एक दो थे वे मुस्लिम मंत्री हटा दिए हैं। लोकसभा विधानसभाओं में टिकट देना बंद कर दिए हैं। उनके कई बड़े नेता मंत्री कहने लगे हैं कि हमें मुस्लिम के वोट नहीं चाहिए। अब तो यहां तक भी कहा जाने लगा है कि अपने काम के लिए भी हमारे पास नहीं आएं। कहने वाले मंत्री विधायक सांसद हैं। जो संविधान की या अपनी धार्मिक आस्था की शपथ लिए हुए हैं कि वे बिना किसी भेदभाव के काम करेंगे।

इस राजनीति को ओवैसी नहीं रोक पाएंगे। इसे देश का सबसे बड़ा विपक्षी दल कांग्रेस ही रोक पाएगा और कांग्रेस कभी भी किसी एक धर्म की जाति की पार्टी नहीं हो सकती। आजादी के आंदोलन से निकली पार्टी है उसे चाहे जितना संघर्ष करना पड़े वह जात-पात से ऊपर उठी पार्टी ही बनी रहेगी। जिसे आजकल की भाषा में कहते हैं डीएनए, वह ही ऐसा है कि कोई चाहे तो भी पार्टी का स्वभाव बदल नहीं सकता।

मोदी को सबसे ज्यादा परेशानी ही कांग्रेस से है। प्रधानमंत्री बनते ही कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया था। एआईएमआईएम मुक्त भारत का क्यों नहीं? यह ओवैसी की पार्टी है। जिसका नाम ही है मुस्लिम एकता की पार्टी। आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमिन ( एआईएमआईएम)। विरोध तो मुस्लिम का करते हैं। एक हजार साल पहले के इतिहास में जाकर कहते हैं कि आज भी वे लोग मौजूद हैं। और उनके सुरक्षा सलाहकार डोभाल तो बदला लेने की बात कहते हैं। मगर मुस्लिम पार्टी को बढ़ावा देते हैं। उसके अध्यक्ष ओवैसी को विदेशों में भेजते हैं भारत का पक्ष रखने के लिए।

सब साफ दीवार पर मोटे-मोटे हर्फों (अक्षरों) में लिखा दिख रहा है मगर मुस्लिमों के एक बड़े हिस्से के आंखों पर भी पट्टी बंध गई है जो यह नहीं देख पा रहा कि मोदी और ओवैसी दोनों की राजनीति एक है। एक हिन्दू की करेगा एक मुस्लिम की। धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को खत्म करने की कोशिश।

यह व्यक्तियों की लड़ाई नहीं है, विचारों की है। धर्मनिपरपेक्षता को खत्म करने के लिए पहले ही छद्म धर्मनिरपेक्षता शब्द गढ़ लिया गया था। जात-पात से ऊपर उठकर सबकी बात करने वालों को छद्म धर्मनिरपेक्ष के साथ अपीजमेंट (तुष्टिकरण) करने वाला कहा गया। मगर देश के हिन्दू और मुस्लिम दोनों ने बीजेपी की इस राजनीति को लंबे समय तक रोके रखा।

लेकिन आज मोदी की धार्मिक विभाजन की राजनीति हिन्दू के साथ मुस्लिम भी फंसा दिखता है। अगर मोदी और ओवैसी की यह राजनीति सफल हो गई तो देश को पाकिस्तान बनने से कोई नहीं रोक सकता। इसलिए मुस्लिम के साथ हिन्दू की और हिन्दू के साथ मुस्लिम की जिम्मेदारी है कि एक मोदी के जाल से निकले और दूसरा ओवैसी के जाल से। वैसे तो असल में दोनों एक ही हैं। हिन्दू राजनीति मुस्लिम राजनीति को फायदा पहुंचाती है और मुस्लिम राजनीति हिन्दू राजनीति को। और दोनों मिलकर देश को नुकसान पहुंचाते हैं।

ऐसे ही द्विराष्ट्रवाद का सिद्धांत सावरकर ने शुरू किया था। समझिए इसीलिए बीजेपी उनके तमाम धार्मिक विचार जो गाय को लेकर भी हैं से अनकम्फर्टेबल रहकर भी उन्हें अपना आदर्श मानती है। बाद में जिन्ना ने भी इस विचार को अपना लिया। और इसका नतीजा देश ने हिन्दू-मुस्लिम राजनीति के रूप में देखा। लेकिन उस समय गांधी थे, नेहरू थे जिनके विशाल व्यक्तित्व ने नफरत और विभाजन की राजनीति के बावजूद देश को संभाले रखा। गांधी को तो अपना बलिदान देना पड़ा। और बाद में नेहरु ने भारत को इस नफरत की राजनीति से बहुत मेहनत और समझ से बाहर निकाला। देश का नवनिर्माण किया।

नेहरू का आज तक विरोध करने का यही कारण है। कि वे धर्मनिरपेक्षता, तरक्की और वैज्ञानिक मिज़ाज की बात करते थे। मोदी तो नेहरू का विरोध करते ही हैं ओवैसी भी करते हैं। वे तो और आगे बढ़कर राहुल की नकल उतारते हुए यह बताते हैं कि वे क्या बोलते, करते हैं। बहुत ही वाहियात मिमिक्री।

क्या बोलते हैं राहुल? आज तक किसी भी समुदाय के बारे में कोई गलत बात बोली? हमेशा यही बोला कि मैं सबके साथ खड़ा हूं। हिन्दू-मुस्लिम सबके। क्या चाहते हैं ओवैसी कि राहुल किसी एक समुदाय के साथ खड़े हो जाएं! मोदी भी यही चाहते हैं। दोनों की राजनीति आसान हो जाएगी।

लेकिन ओवैसी जरा यह बता दें कि केवल मुस्लिम के वोट से वे हिजाबी प्रधानमंत्री कैसे बना लेंगे? महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी सबको नुकसान पहुंचाकर उनका बड़ा अचीवमेंट क्या है? खुद की जीती सीटें या बीजेपी को मुंबई में रिकार्ड जिताई 89 सीटें? 13 नगर निगमों में उनकी जीत 125 वार्डों में बताई जा रही है। और इससे कई गुना ज्यादा सीटों पर उन्होंने धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के उम्मीदवारों को हराया है। यही उन्हें काम दिया गया था और यही उनकी उपलब्धि है। खुद कहीं अध्यक्ष नहीं बना पाएंगे। मगर बीजेपी के बनवा देंगे।

अब कुछ ही समय में बंगाल, केरल, असम, तमिलनाडु, पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ओवैसी गोदी मीडिया के बाद सबसे बड़े मोदी समर्थक के रूप में नजर आएंगे। वैसी ही घोषणा करते हुए जैसा गोदी मीडिया कहता है कि हम मोदी के साथ थोड़ी हैं। गोदी मीडिया तो पूरी तरह एक्सपोज हो गया। जनता समझने लगी है कि वह केवल मोदी के लिए ही काम करता है। ओवैसी के बारे में मुस्लिम के लिए यह समझना अभी बाकी है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)


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