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ललित सुरजन की कलम से भारत और पड़ोसी देश

'बंगलादेश के साथ हमारे संबंध स्वाभाविक रूप से मधुर होना चाहिए।

ललित सुरजन की कलम से भारत और पड़ोसी देश
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'बंगलादेश के साथ हमारे संबंध स्वाभाविक रूप से मधुर होना चाहिए। शेख हसीना ने इस दिशा में अपनी ओर से कभी कोई कमी नहीं की, लेकिन इसके चलते वे हमेशा खालिदा जिया व अन्य कट्टरपंथियों के निशाने पर रहीं।

बंगलादेश की आर्थिक, भौगोलिक स्थिति कुछ ऐसी है कि वहां के लोग स्वेच्छा से नहीं मजबूरी में रोजी-रोटी की तलाश में भारत आते हैं। अब यदि भाजपा बंगलादेशियों को वापिस खदेडऩे के अपने पुराने नारों पर कायम रही तो इससे शेख हसीना की स्थिति कमजोर पड़ेगी।

तीस्ता जल संधि तथा ग्रामीण संकुलों का विनिमय जैसे कुछ रुके मुद्दे भी हैं जिन पर नरेन्द्र मोदी को ममता बनर्जी के साथ जूझना पड़ेगा। ऐसी ही कुछ स्थिति नेपाल में भी है। विश्व हिन्दू परिषद इत्यादि चाहेंगे कि नेपाल में हिन्दू राष्ट्र की पुर्नस्थापना हो, जबकि वहां की नई पीढ़ी आगे निकल चुकी है।

नेपाल के साथ नदीजल वितरण, आतंकवाद, नेपालियों को भारत में रोजगार जैसे मुद्दे भी हैं जिन पर नेपाल में भी एक राय नहीं है।'

(देशबन्धु में 29 मई 2014 को प्रकाशित)

https://lalitsurjan.blogspot.com/2014/05/blog-post_28.html


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