महिलाओं के बारे में अनर्गल प्रलाप कब तक !
बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और मोतिहारी से भाजपा विधायक प्रमोद कुमार का एक बेहद आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर पिछले महीने चर्चा में रहा।

पलाश सुरजन
हाल ही में एक पत्रकार को कहे गये अपशब्द को लेकर निशाने पर आये कैलाश विजयवर्गीय अपने काम से ज़्यादा तो ऊटपटांग बयान देने के लिये जाने जाते हैं। एक बार बलात्कार की लगातार बढ़ती घटनाओं पर टिप्पणी करते हुए विजयवर्गीय ने मीडिया से बात करते हुए कहा था, 'एक ही शब्द है मर्यादा। मर्यादा का उल्लंघन होता है, तो सीता हरण हो जाता है। लक्ष्मण रेखा हर व्यक्ति की खींची गई है, उसे कोई भी पार करेगा, तो रावण सामने बैठा है।
बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और मोतिहारी से भाजपा विधायक प्रमोद कुमार का एक बेहद आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर पिछले महीने चर्चा में रहा। इस वीडियो में वे कहते दिखाई दे रहे हैं कि 'बहुत लोगों की आदत होती है कुत्ता के साथ सोना। मोबाइल पर देखिएगा तो बहुत लेडीज जो हैं, वो अपने आप में संतुष्टि के लिए कुत्ता के साथ सोती हैं।' अपने इस कथन के समर्थन में प्रमोद कुमार ने मोबाइल पर ऐसे कई वीडियो मौजूद होने का हवाला दिया। यह वीडियो कब का था और विधायक ने यह बात किस सिलसिले में कही, यह स्पष्ट नहीं हुआ। लेकिन इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी के संसद परिसर में कुत्ता लेकर पहुंचने के बारे में पूछे गये सवाल का जवाब उन्होंने दिया हो।
इस प्रसंग की याद इसलिये आई कि हाल ही में उत्तराखंड में प्रमोद कुमार की ही पार्टी के गिरधारी लाल साहू भी विवादों में घिर गये। भाजपा कार्यकर्ताओं की एक बैठक में साहू ने एक अविवाहित कार्यकर्ता को संबोधित करते हुए कहा कि 'लड़कियों की कोई कमी नहीं है' और 'बिहार में 20-25 हजार रुपये में शादी के लिए लड़कियां मिल जाती हैं।' अपने कार्यकर्ता को बिन मांगे दी गई इस सलाह का वीडियो वायरल होने के बाद बवाल मच गया। हालांकि साहू ने दूसरा वीडियो जारी कर इस पर सफाई दी और माफ़ी मांगी। यह विडंबना ही है कि यह शर्मनाक बयान उस शख्स ने दिया, जिसकी पत्नी उत्तराखंड सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री है।
लेकिन प्रमोद कुमार और गिरधारी लाल जैसों को शायद ही कोई फ़र्क पड़ता हो क्योंकि महिलाओं पर या उनके बारे में अशोभनीय टिप्पणियां करने की भाजपा में एक परंपरा सी बन गई है। प्रधानमंत्री से लेकर पार्टी के छुटभैये नेताओं तक के मुखारविंद से ऐसे सुभाषित टपकते ही रहते हैं। नरेंद्र मोदी ने खुद जर्सी गाय कहकर सोनिया गांधी पर कटाक्ष किया था, फिर सुनंदा पुष्कर को 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड कह डाला और सदन की गरिमा का खयाल किये बिना संसद में कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी की हंसी की तुलना शूर्पणखा से कर दी। चुनावी सभा में ममता बनर्जी को जिस तरीके से उन्होंने 'दीदी ओ दीदी' कहकर पुकारा था, वह शालीनता की परिभाषा में तो नहीं ही आता।
ज़ाहिर है कि जब सत्ता के शिखर पर बैठे नेता का आचार-व्यवहार ऐसा हो तो उनके सिपहसालार कहां पीछे रहने वाले हैं। इसीलिए पश्चिम बंगाल से भाजपा सांसद दिलीप घोष राज्य की मुख्यमंत्री के बारे में कह देते हैं कि 'दीदी गोवा में खुद को गोवा की बेटी बताती हैं, त्रिपुरा जाकर खुद को त्रिपुरा की बेटी बताती हैं, उन्हें पहले अपने पिता की पहचान करनी चाहिये।' यह बयान देते समय घोष महाशय भूल गये कि मोदीजी भी जिस जगह जाते हैं, वहां से कोई न कोई नाता वे जोड़ ही लेते हैं, तब क्या उनके बारे में भी ऐसी अवांछित टिप्पणी की जा सकती है? मप्र के गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने एक बार कहा कि महिलाएं भले ही बांझ रहें, मगर ऐसे बच्चे को जन्म न दें, जो संस्कारी न हो और जो समाज में विकृति पैदा करते हों। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेता वसंत देशमुख ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोराट की बेटी डॉ जयश्री को लेकर बेहद गंदा बयान दिया था। उसका ज़बरदस्त विरोध हुआ तो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को सफाई देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उत्तर प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान यह माना जा रहा था कि प्रियंका गांधी को कांग्रेस-समाजवादी पार्टी के गठबंधन की ओर से सितारा प्रचारक की भूमिका अदा करेंगी। एक समाचार एजेंसी ने भाजपा नेता विनय कटियार से इस बाबत सवाल किया, तो उनका जवाब था - 'क्या फ़र्क पड़ता है। उनसे ज़्यादा ख़ूबसूरत और भी लड़कियां हैं जो स्टार कैंपेनर हैं...हीरोइन हैं और कई कलाकार हैं।' भाजपा के ही दूसरे नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने मुंबई में राजनेताओं के खिलाफ नारेबाजी कर रहीं कुछमहिलाओं के बारे में कह दिया था कि ये लिपिस्टिक-पाउडर लगाकर क्या विरोध करेंगी। नक़वी ने उन महिलाओं की तुलना कश्मीर के अलगाववादियों से की थी। उत्तर प्रदेश के मौजूदा परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मायावती की तुलना 'वेश्या' से कर दी थी। सत्ता पक्ष की किसी महिला के बारे में विपक्ष का कोई व्यक्ति ऐसी बात कह दे तो आसमान सिर पर उठाने में संघ-भाजपा के लोगों को एक सेकंड नहीं लगेगा।
दो महीने पहले उत्तर प्रदेश में ही भाजपा के पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने एक जनसभा में हिन्दू युवकों से कहा कि वे मुस्लिम महिलाओं से शादी करें। सिंह ने यह लक्ष्य भी तय कर दिया कि कम से कम 10 मुस्लिम महिलाओं के साथ ऐसा करना पड़ेगा, इससे कम वे स्वीकार नहीं करेंगे। इसके लिये उन्होंने पुरस्कार और नौकरी देने का ऐलान भी किया। 2014 में वायरल हुए एक वीडियो में उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कथन भी इसी तरह का था। 'लव जेहाद' को लेकर उन्होंने कहा था कि हमने फ़ैसला किया है कि अगर वे एक हिन्दू लड़की का धर्म परिवर्तन करवाते हैं तो हम सौ मुस्लिम लड़कियों का धर्म परिवर्तन करवाएंगे। बाद में योगी ने वीडियो के बारे में कहा कि मैं इस मुद्दे पर कोई सफ़ाई नहीं देना चाहता। सिंह और योगी- दोनों के ये भड़काऊ बयान न केवल महिलाओं की गरिमा को चोट पहुंचाने वाले थे, बल्कि संविधान के भी खिलाफ़ थे।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद जम्मू में भाजपा नेता विक्रम रंधावा ने कहा कि कांग्रेसियों को सिंदूर कभी बर्दाश्त नहीं हो सकता, क्योंकि उन्हें इसकी कीमत ही पता नहीं है। सोनिया ने सिंदूर नहीं लगाया और अब वह लगाने लायक ही नहीं है। रंधावा ने आगे कहा कि कोई एक दिन प्रियंका की मांग में सिंदूर दिखा दे। ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान सेना की प्रवक्ता कर्नल सोफिया कुरैशी को मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह ने पाकिस्तानियों की बहन कह दिया था, जिसके लिए उन्हें अदालत ने भी लताड़ा। भाजपा सांसद रामचंद्र जांगड़ा ने पहलगाम हादसे में अपने पतियों को खो देने वाली महिलाओं के बारे में कहा था कि 'जिनका सिंदूर छिन गया, उनमें वीरांगना का भाव नहीं था। अगर उनमें जज़्बा होता तो वे लड़तीं। अगर वे लड़तीं तो पहलगाम में इतने लोग नहीं मरते।'
हाल ही में एक पत्रकार को कहे गये अपशब्द को लेकर निशाने पर आये कैलाश विजयवर्गीय अपने काम से ज़्यादा तो ऊटपटांग बयान देने के लिये जाने जाते हैं। एक बार बलात्कार की लगातार बढ़ती घटनाओं पर टिप्पणी करते हुए विजयवर्गीय ने मीडिया से बात करते हुए कहा था, 'एक ही शब्द है मर्यादा। मर्यादा का उल्लंघन होता है, तो सीता हरण हो जाता है। लक्ष्मण रेखा हर व्यक्ति की खींची गई है, उसे कोई भी पार करेगा, तो रावण सामने बैठा है, वह सीता हरण करके ले जायेगा।' अपने साथी की इस आपत्तिजनक टिप्पणी पर विवाद बढ़ता देख तत्कालीन भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद को कहना पड़ा कि 'पार्टी इस बयान से ख़ुद को दूर रखती है और उन्होंने कैलाश से ये बयान वापस लेने को कहा है।' प्रसाद के इस बयान के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि, 'उनका मक़सद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।'
कहने की ज़रूरत नहीं कि 'महिलाओं के सम्मान में, भाजपा मैदान में' और 'बहुत हुआ नारी पर वार,अबकी बार मोदी सरकार' नारे और 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे जुमले उछालने वाली पार्टी के नुमाइंदों की सोच कैसी है। वे महिलाओं को कायर और बिकाऊ कह सकते हैं, उन्हें मशीन मानकर ज़्यादा और अच्छी नस्ल के बच्चे पैदा करने की सलाह दे सकते हैं, उनकी वैवाहिक स्थिति, बोलचाल, हंसने-रोने, बनाव-सिंगार और पहनावे पर ओछी टिप्पणियां कर सकते हैं, उन्हें मर्यादा में रहने के उपदेश दे सकते हैं। और जब बवाल मचे, सवाल खड़े हों तो सफाई देकर, अफ़सोस जताकर, माफ़ी मांगकर या फिर सीधे-सीधे पल्ला झटक कर मामले को रफा-दफा कर सकते हैं। लेकिन सवाल ये है कि अपने आपको महिलाओं का सबसे बड़ा हितैषी बताने वाली पार्टी के लोग, महिलाओं को लेकर कब तक बदजुबानी करते रहेंगे।


