हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति खत्म, जनता सड़कों पर

- शकील अख्तर
लोग टकराव की बात कर रहे हैं। लेकिन हमारा मानना है कि आन्दोलनों के विभिन्न रूप होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। जनता अपने आप पहचान जाती है कि कौन उसके लिए ईमानदारी से लड़ रहा है और कौन बेवजह दूसरे पर सवाल उठा रहा है। राहुल किसी पर सवाल नहीं उठा रहे। उन पर जो लोग सवाल उठा रहे हैं वे दिखने में चाहे मोदी के विरोध में दिखें मगर राहुल पर सवाल उठा कर वे अप्रत्यक्ष रूप मोदी की ही मदद कर रहे हैं।
यह प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह का आखिरी दांव है और असफल जा रहा है। पूरा देश उनके खिलाफ उठ कर खड़ा हो गया है। ऐसा मोदी ने कभी सोचा नहीं था। उन्हें अपने हिन्दू-मुस्लिम अजेंडे पर बहुत भरोसा था। मगर जन आन्दोलन ही एक ऐसी चीज होता है जो हर बैरिकेड्स को तोड़ देता है।
आज राजनीतिक नेता, पत्रकार और दूसरे तमाम लोग यह कह रहे हैं कि ये हिन्दू लड़कियों के साथ क्या हो रहा है? नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तो बीजेपी आरएसएस के गुंडे शब्द का शाम को बाद में प्रयोग किया मगर बहुत सारे लोग दिन में ही यह कहने लगे थे। और ध्यान देने वाली बात यह है कि इनमें से बहुत सारे लोग मोदी समर्थक थे।
पिछले एक हफ्ते से चले घटनाक्रम ने उनकी कई धारणाओं को तोड़ा है। उनमें सबसे खास यह है कि मोदी केवल मुस्लिम को टाइट करेंगे उन लोगों के लिए हर तरह की छूट और सुरक्षा है। लेकिन शनिवार को दिल्ली की सड़कों पर जो हुआ लड़कियों, छोटी-छोटी बच्चियों के कपड़े जिस तरह उतारने की कोशिश की गई, मार-पीट, गाली-गलौज उनकी कीमत लगाना इन सब के बाद वे लोग जो सोच रहे थे कि ये हिन्दुओं की रक्षा के लिए आए हैं उनका मोहभंग हो गया। क्योंकि जितनी लड़कियों के साथ यौन दुर्व्यवहार हुआ है उनमें से लगभग सभी हिन्दू ही थीं। इससे पहले भी जन्तर मन्तर वन और उसके बाद हुई सड़क की हर दुर्व्यवहार की घटना और पकड़ के ले जाने पर थाने में जो कुछ लड़कियों और लड़कों के साथ भी हुआ वे भी वही लोग थे जिनकी रक्षा के नाम पर मोदी हर चुनाव में वोट मांगते हैं। श्मशान कब्रिस्तान तक की बातें करते हैं।
पुलिस अत्याचार का शिकार लड़के- लड़कियों ने एक प्रेस कान्फ्रेंस में जो बताया उसको सुनना भी मुश्किल था। अभी शनिवार को तो दिल्ली की सड़कों पर लड़कियों के साथ पुलिस की मौजूदगी में गुंडों ने कपड़े उतारने की कोशिश से लेकर हर तरह की बदतमीजी की। मगर उससे पहले इन्होंने थानों के अंदर जाकर लड़के-लड़कियों के साथ वह वह हरकतें कीं कि बच्चे बता नहीं पा रहे थे।
लड़कों के भी कपड़े उतारे गए। जो ज्यादा विरोध कर रहा था उसे कहा गया कि तू मुस्लिम है। लड़के ने अपना नाम बताया। कहा आधार देख लो नहीं माने। लड़कियों की दुर्दशा तो आप सुन ही नहीं सकते। इनमें वह लड़की भी शामिल थी जिस पर एक पुलिस अधिकारी असिस्टेंट कमिश्नर आफ पुलिस रैंक के विवेक भगत ने तीन अक्टूबर को सड़क पर यौन हमला किया था। और उसके बाद उसके प्रमोशन का आर्डर आया।
मगर सोशल मीडिया और थोड़ी सी जिन्दा बची पत्रकारिता ने इस मुद्दे को इतना उठाया कि प्रमोशन का आर्डर पेन्डिंग रखना पड़ा। सीमित सही मगर साहसिक पत्रकारिता का यह असर रविवार को भी देखने को मिला जब शनिवार को पुलिस के साथ मिलकर खुली गुंडागर्दी कर रहे चार गुंड़ों को पुलिस को ही गिरफ्तार करना पड़ा। यह सब गुंडे और इनके संरक्षक पहले से हाथों में लाठियां लिए वीडियो बनाकर धमकियां दे रहे थे। और 12 साल से यही कर रहे हैं।
लेकिन शनिवार की घटनाएं, जो कैमरों में कैद हो गईं, उनके विडियो वायरल हो गए, उस के बाद जब खुद मोदी के समर्थक रहे लोग यह कहने कि अब तो ये हिन्दू लड़कियों के साथ करने लगे तब सबको एक बड़ा झटका लगा।
नफरत चीज ही ऐसी है कि वह किसी एक के खिलाफ केन्द्रित नहीं रहती है। मोदी ने मुसलमानों के खिलाफ इसे लाया था। शाहीन बाग़ के आन्दोलन के समय इसे चरम पर पहुंचा दिया गया था। दिल्ली में दंगे करवाए गए। जबकि दिल्ली में ऐसा कहीं माहौल ही नहीं था। इसी हिन्दू-मुसलमान के सहारे मोदी 12 साल से राज करने में सफल रहे।
मगर अब जब लोगों ने खासतौर से हिन्दुओं ने देखा कि किस तरह उनकी बच्चियों के साथ अनपढ़ गुंडे बुलाकर उनके कपड़े उतारने की कोशिश की जा रही है उनकी तीन-तीन सौ रुपए कीमत लगाई जा रही है तो वे चौंक गए। इससे पहले शाहीन बाग़ की औरतों के लिए भी ऐसा ही कहा गया था कि पचास-पचास रुपए देकर धरने पर बिठाया जा रहा है। किसान आंदोलन की महिलाओं के लिए भी। भाजपा सांसद कंगना रनौत ने भी कहा जिससे आक्रोशित होकर सुरक्षा बल की एक महिलाकर्मी ने जो किसान की बेटी थी कंगना रनौत को चांटा भी मारा था।
लेकिन अब जब सड़क पर निकलने वाली हर लड़की बच्ची को पकड़-पकड़ कर उसका चीरहरण किया जाने लगा तो लोगों के मन में मोदी भक्ति के बदले मोदी के खिलाफ आक्रोश पैदा होने लगा। हिन्दुओं की सुरक्षा के नाम पर तो मोदी आए थे। नारा नारी की सुरक्षा का भी था। मगर नारी में सब धर्म जाति के आ जाते हैं तो उसे लोगों ने ज्यादा अपने हित वाले भाव से नहीं लिया। मगर हिन्दू खतरे में हैं और मैं उनकी रक्षा करूंगा यह बात मोदी लोगों के दिमाग में उतारने में सफल हो गए। इसलिए वे मंगल सूत्र जैसे प्रतीक बोलते हैं कि छीन कर ले जाएंगे।
मगर छात्र और युवा पहले पेपर लीक पर और अब चुनाव चोरी पर जब आवाज उठाने लगे तो वही नफरत जो मुस्लिम के खिलाफ लाए थे इन बच्चों के खिलाफ भी सामने आ गई। खासतौर से लड़कियों के। और लड़कियां भी ज्यादातर उस मध्यम वर्ग की जिनके माता- पिता सबसे ज्यादा मोदी से प्रभावित हुए थे। नेहा वोरा के बारे में आप लोगों को मालूम होगा कि उसके माता-पिता दोनों मोदी समर्थकों में आते हैं। लेकिन अब जब उनकी लड़की के साथ और दूसरी लड़कियों के साथ एक से एक गलत व्यवहार होता है तो अभी तक मोदी का समर्थन कर रहे लोगों के दिमाग में भी सवाल आता है कि हमारे साथ भी वैसा ही व्यवहार।
नेहा वोरा इस आन्दोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। निर्भय और प्रतिबद्ध। उसकी हिम्मत सबने देख ली। जब सीजेपी के सब बड़े नेता घोषणा करके दिल्ली आए और जाहिर है कि उसके बाद उन्हें पकड़ा ही जाना था, के बरअक्स नेहा शनिवार को अचानक सड़क पर आई और हिरासत में लिए जाने से पहले अपना प्रतिरोध दर्ज कराया।
जब सरकार इतनी जालिम हो तब प्रतिरोध इसी तरह छापेमारी के अंदाज में किया जाता है। राहुल ने चार दिन लगातार दिल्ली में यही किया। और उससे पहले पेपर लीक के मुद्दे के समय भी। खैर हम फिलहाल सीजेपी ( काक्रोच जनता पार्टी) पर बात नहीं कर रहे हैं।
लोग टकराव की बात कर रहे हैं। लेकिन हमारा मानना है कि आन्दोलनों के विभिन्न रूप होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। जनता अपने आप पहचान जाती है कि कौन उसके लिए ईमानदारी से लड़ रहा है और कौन बेवजह दूसरे पर सवाल उठा रहा है।
राहुल किसी पर सवाल नहीं उठा रहे। उन पर जो लोग सवाल उठा रहे हैं वे दिखने में चाहे मोदी के विरोध में दिखें मगर राहुल पर सवाल उठा कर वे अप्रत्यक्ष रूप मोदी की ही मदद कर रहे हैं। अगर राहुल ही मैनेज हो जाएं तो फिर मोदी के लिए कोई समस्या बचती ही नहीं है। राहुल ही एकमात्र मोदी के लिए चैलेंज हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)


