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वृद्धावस्था में स्वास्थ्य सुधार व सार्थक भूमिका

आर्थिक-सामाजिक विकास व बढ़ती अनुमानित आयु के साथ विश्व की जनसंख्या में वृद्ध व्यक्तियों का प्रतिशत बढ़ रहा है

वृद्धावस्था में स्वास्थ्य सुधार व सार्थक भूमिका
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सुधार के प्रयासों के बावजूद वृद्धावस्था में अपंगता, अपने जरूरी कार्यों को न कर पाने की अक्षमता व असहाय स्थिति की संभावना विभिन्न कारणों से किसी भी समाज के अनेक वृद्ध व्यक्तियों को प्रभावित कर सकती है। इसके लिए केयर या देखभाल की सुविधाएं वृद्ध व्यक्तियों के लिए संतोषजनक ढंग से उपलब्ध होनी चाहिए।

आर्थिक-सामाजिक विकास व बढ़ती अनुमानित आयु के साथ विश्व की जनसंख्या में वृद्ध व्यक्तियों का प्रतिशत बढ़ रहा है। इसके साथ यह जरूरत भी बढ़ रही है वृद्धावस्था में स्वास्थ्य ठीक बना रहे व समाज में सार्थक योगदान देने की स्थिति बनी रहे। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित स्वस्थ वृद्धावस्था का दशक भी इन दिनों मनाया जा रहा है।

वृद्धावस्था में स्वस्थ बने होने के तीन पक्षों को विशेष तौर पर रेखांकित किया जा सकता है। पहला तो यह है कि वृद्धावस्था में होने वाली दुर्घटनाओं को न्यूनतम किया जाए क्योंकि एक बड़ी दुर्घटना होने पर वृद्धावस्था में उससे उबर कर स्वस्थ जीवन बिताने की संभावना कम हो जाती है, शारीरिक अक्षमता व असक्रियता की संभावना बढ़ जाती है और इस स्थिति में अनेक अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं। विशेषकर गिरने की दुर्घटनाएं वृद्धावस्था में अधिक होती हैं। ऐसी दुर्घटनाओं के अधिक होने के समाचार हमें अपने आसपास के परिवेश से मिलते ही रहते हैं। यह विभिन्न संदर्भों में निर्धन व धनी परिवारों दोनों में देखा जाता है। जहां ऊबड़-खाबड़ व पथरीली जमीन में निर्धन वृद्ध अधिक गिरते हैं, वहां अधिक चमकीले व फिसलन वाले आवासों के कारण धनी परिवारों के वृद्ध भी अधिक गिर सकते हैं।

विश्व स्तर की स्थिति के बारे में बर्डन ऑफ डिजीज अध्ययन के आंकड़ों के आधार पर बताया गया है कि एक वर्ष में (वर्ष 2021 में) विश्व में गिरने से 5.5 लाख वृद्ध व्यक्तियों की मृत्यु हुई जबकि केवल दक्षिण एशिया में इस वर्ष गिरने से 1.7 लाख वृद्ध व्यक्तियों की मृत्यु हुई। जहां गिरने से मौत होती है ऐसी प्रत्येक दुर्घटना पर ऐसी अनेक दुर्घटनाएं होती हैं जिनसे गंभीर चोट लग जाए या अपंगता हो जाए। अत: वृद्ध व्यक्तियों में दुर्घटनाओं और विशेषकर गिरने वाली दुर्घटनाओं को कम करने पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए वृद्ध व्यक्तियों के आसपास की स्थितियों को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है व उनके द्वारा अपनाई जाने वाली सावधानियों को भी बढ़ाया जा सकता है।

वृद्ध व्यक्तियों के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इस स्वास्थ्य की बेहतरी के अनेक प्रयास तब ही असरदार होंगे यदि वे वृद्धावस्था में प्रवेश करने से कुछ वर्ष पहले ही आरंभ हो जाएं व हो सके तो 45 से 50 वर्ष की आयु के आसपास ही आरंभ हो जाएं।

धूम्रपान, तंबाकू, शराब आदि को छोड़ने के बारे में कहा जा सकता है कि यह तो वृद्धावस्था के प्रवेश से बहुत पहले ही हो जाना चाहिए। इसी तरह अनुचित खाद्यों के सेवन व स्वास्थ्य के प्रतिकूल अन्य आदतों के बारे में भी यह कहा जा सकता है। यदि जरूरी सावधानी अनेक वर्ष पहले अपना ली जाए तो वृद्धावस्था के प्रवेश द्वार पर अनेक गंभीर बीमारियों व स्वास्थ्य समस्याओं की संभावना कम हो जाएगी।

तीसरा पक्ष मानसिक व भावनात्मक समस्याओं से जुड़ा है। इस तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को वृद्धावस्था में कम करने में समुदाय व परिवार की भी महत्वपूर्ण भूमिका है व वृद्ध व्यक्ति अपने प्रयासों से भी सुधार कर सकते हैं।

वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है व इसके लिए सभी वृद्ध व्यक्तियों, पुरुषों व महिलाओं के लिए समुचित पेंशन की व्यवस्था होनी चाहिए, फि र चाहे वे जीवन भर किसी भी तरह के रोजगार या स्व-रोजगार से जुड़े रहे हों या उन्होंने घरेलू जिम्मेदारियों को ही संभाला हो।

सुधार के प्रयासों के बावजूद वृद्धावस्था में अपंगता, अपने जरूरी कार्यों को न कर पाने की अक्षमता व असहाय स्थिति की संभावना विभिन्न कारणों से किसी भी समाज के अनेक वृद्ध व्यक्तियों को प्रभावित कर सकती है। इसके लिए केयर या देखभाल की सुविधाएं वृद्ध व्यक्तियों के लिए संतोषजनक ढंग से उपलब्ध होनी चाहिए।

हालांकि केयर सेवाओं की उपस्थिति विभिन्न समाजों में बढ़ रही हैं, पर कई बार यह वृद्धि इस तरह से होती है कि जो समाज की वास्तविक जरूरतों के अनुकूल नहीं होती हैं। केयर उद्योग ऐसा नही है जो मुनाफे के अर्थशास्त्र से पूरी तरह नियंत्रित होने पर सही सेवा दे सके। मुनाफे के आधार पर चलने से केयर उद्योग केवल धनी व्यक्तियों या परिवारों को अपनी सेवाएं उपलब्ध होने पर केंद्रित हो जाएगा, जबकि समाज को सभी स्तर पर, मध्यम वर्ग के स्तर पर, कम आय के स्तर पर, शहरी व ग्रामीण दोनों स्तर पर केयर सुविधाओं की जरूरत है। अत: अनुकू ल केयर सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए सरकार को उचित नीतियों से सही माहौल बनाना होगा व इस प्रयास में, विशेषकर मध्यम व निर्धन वर्ग के लिए तथा दूर-दूर के गांवों के लिए केयर सुविधा उपलब्ध करवाने में स्वैच्छिक संस्थाओं व समाजसेवियों की भी महत्वपूर्ण व बहुत उपयोगी भूमिका हो सकती है।

कुछ स्वैच्छिक संस्थाएं इस समय भी वृद्ध व्यक्तियों व विशेषकर ग्रामीण तथा निर्धन वर्ग के वृद्ध व्यक्तियों की बेहतरी के लिए उल्लेखनीय प्रयास कर रही हैं। दक्षिण राजस्थान के अनेक गांवों में अर्थ संस्था (एक्शन, रिसर्च, ट्रेनिंग फार हैल्थ) के 'प्रबल यात्राÓ प्रयास ने विशेषकर सुरक्षा बढ़ाई है व दुर्घटनाओं को कम करने, पोषण की स्थिति सुधारने, अनेक स्वास्थ्य समस्याओं को कम करने में व कठिन समय में सहायता पहुंचाने की दृष्टि से दूर-दूर के अनेक गांवों में सराहनीय प्रयास किए हैं। विभिन्न सरकारी सुविधाओं को वृद्ध नागरिकों तक पहुंचाने के लिए भी यह प्रयास सक्रिय रहा है। इस तरह के प्रयासों की समाज में आवश्यकता बढ़ रहीे है।


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