पतंगबाजी में मगन सरकार
असम के कालियाबोर में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र नगरीय निकाय चुनावों को लेकर कांग्रेस पर एक बेहूदा टिप्पणी की।

असम के कालियाबोर में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र नगरीय निकाय चुनावों को लेकर कांग्रेस पर एक बेहूदा टिप्पणी की। इन चुनावों में भाजपा ने कई निगमों पर अपना कब्जा जमाया है और सबसे बड़ी जीत तो बृहन्नमुंबई नगरपालिका में मिली है, जहां भाजपा ने शिवसेना को पीछे कर दिया है। लेकिन महाराष्ट्र के चुनावों में कांग्रेस को चौथा स्थान मिला है, जिस पर अपनी जीत का घमंड दिखाते हुए नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस का जन्म 1885 में मुंबई में हुआ था, लेकिन फिर भी वह अपनी नकारात्मक राजनीति के कारण पहले स्थान पर नहीं आ पाई। कांग्रेस ने देश का भरोसा खो दिया है क्योंकि उसके पास कोई विकास का एजेंडा नहीं है। महाराष्ट्र में जहां कांग्रेस ने सालों तक शासन किया, कांग्रेस पूरी तरह खत्म हो गई है।
असम चुनावों में महाराष्ट्र के नगरीय निकाय चुनावों का जिक्र कर और उसमें भी कांग्रेस की हार पर टिप्पणी कर प्रधानमंत्री मोदी क्या हासिल करना चाहते हैं, यह समझना कठिन नहीं है। दरअसल उनकी सबसे बड़ी कुंठा ही यही है कि वे कांग्रेस को खत्म नहीं कर पा रहे हैं। नेहरूजी से लेकर राहुल गांधी तक के लिए तमाम अपमानजनक और अक्सर झूठी बातें कहने के बावजूद गांधी परिवार को धर्मनिरपेक्ष राजनीति से डिगा पाने में नरेन्द्र मोदी असफल रहे हैं, इसलिए उन्हें चुनावी जीत के बावजूद खुशी नहीं मिल पा रही।
यूं भी नरेन्द्र मोदी चुनाव दर चुनाव जीतने के बावजूद अपनी जिम्मेदारियों को कहां पूरा कर पा रहे हैं, उनकी जगह राहुल गांधी ही पीड़ितों के आंसू पोंछते नजर आते हैं। अभी इंदौर में ही कम से कम 24 लोगों की मौत गंदा पानी पीने से हो गई। इसमें लोगों की नहीं सरकार की गलती है, जो लोगों को पीने का साफ पानी मुहैया नहीं करा पाई। अब भी कई लोग इसी वजह से अस्पताल में भर्ती हैं। लेकिन भाजपा अपनी गलती मानने की जगह मामले को किस तरह दबाने में लगी है, इसकी कई खबरें बाहर आ चुकी हैं।
मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार है और इंदौर नगरनिगम पर भी भाजपा का ही कब्जा है। और इसके लिए भी भाजपा नेता नरेन्द्र मोदी को ही श्रेय देते हैं। जैसे रविवार के कई अखबारों में मुंबई में जीत का श्रेय नरेन्द्र मोदी को देने वाले विज्ञापन एकनाथ शिंदे ने छपवाए हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने भी मोदी के नेतृत्व को ही जीत का श्रेय दिया है। लेकिन क्या मोदी की भूमिका यहीं तक सीमित है कि वे भाजपा को किसी भी तरह से जीत दिलाएं और उसके बाद हारे हुए दलों पर नकारात्मक टिप्पणी करें। क्यों नरेन्द्र मोदी को अब तक फुर्सत नहीं मिली कि वे एक बार कुछ घंटों के लिए ही इंदौर चले जाते। वहां भी राहुल गांधी ही पहुंचे।
राहुल गांधी ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर लिखा कि बीजेपी की डबल इंजन सरकार का नया स्मार्ट सिटी मॉडल। पानी में ज़हर, हवा में ज़हर, दवा में ज़हर, ज़मीन में ज़हर, और, जवाब मांगो तो चलेगा बुलडोजर! कुछ इस तरह इस मॉडल में गरीबों की मौतों के लिए कोई भी ज़िम्मेदार नहीं होता। सरकार अभी उनकी लापरवाही से हुई इंदौर की त्रासदी की जवाबदेही ले- दोषियों को सजा और पीड़ितों को अच्छा इलाज और मुआवजा जल्द से जल्द दिलाए।
बता दें कि राहुल गांधी के इंदौर आने पर भी भाजपा विरोध कर रही थी। उसके मुताबिक राहुल गांधी राजनीति के मकसद से आ रहे थे। हालांकि इसे भाजपा की नासमझी ही माना जाए, क्योंकि राजनेता अगर राजनीति न करे तो फिर क्या करे। और अगर पीड़ितों के हक में आवाज़ उठाना या उनके आंसू पोंछने आना राजनीति है, तो ऐसी राजनीति देश के हर जनप्रतिनिधि को करनी चाहिए। लेकिन मणिपुर से लेकर इंदौर तक हर बार राहुल गांधी ही पीड़ितों के साथ खड़े दिखते हैं। नरेन्द्र मोदी तो केवल पतंगबाजी, पूजा-पाठ, ट्रेन को हरी झंडी दिखाते या फिर चुनावी सभाओं को संबोधित करते दिखते हैं।
हैरानी की बात ये है कि इस पर भी मीडिया नरेन्द्र मोदी से सवाल करने की जगह राहुल गांधी से ही सवाल करता है। शनिवार को ही जब राहुल इंदौर में थे, तो एक पत्रकार ने उनसे यही राजनीति करने वाला सवाल पूछा तो राहुल गांधी ने साफ कहा कि वे नेता प्रतिपक्ष हैं और उनकी जिम्मेदारी है कि वे लोगों के दुख में उनके साथ खड़े रहें। राहुल गांधी ने ये भी कहा कि उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि कौन इस बारे में क्या सोचता है।
यह सीधा लेकिन चुभता हुआ जवाब जनता को भी सुनना चाहिए जो इस बात से खुश रहती है कि उसके प्रधानमंत्री कितने धार्मिक आयोजनों में स्वांग भरते दिखाई देते हैं। उसे इस बात की नाराजगी होनी चाहिए कि प्रधानमंत्री अपनी जिम्मेदारी पूरी करते हुए क्यों नहीं दिखते। और प्रधानमंत्री की तर्ज पर ही अमित शाह भी चल रहे हैं। अभी पहलगाम और दिल्ली के आतंकी हमलों के जख्म भरे नहीं हैं। देश की सीमाओं पर लगातार खतरा बना हुआ है। नागरिकों को सुरक्षित महसूस नहीं हो रहा। लेकिन राजधानी दिल्ली को पतंगबाजी में अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाने की योजना अमित शाह बना रहे हैं। बता दें कि दिल्ली में अभी तीसरे अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का आयोजन हुआ, जिसमें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने निर्देश दिए कि राजधानी को पतंगोत्सव का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाने के लिए एक विशेष समिति बनाई जाए। दिल्ली के बांसेरा पार्क में आयोजित डीडीए के सालाना पतंगोत्सव में शामिल हुए अमित शाह ने कहा कि दिल्ली में इस आयोजन को आगे बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं। अगर सतत प्रयास किए जाएं और जनभागीदारी बढ़ाई जाए, तो यह उत्सव देश ही नहीं बल्कि दुनिया के बड़े पतंग महोत्सवों में अपनी जगह बना सकता है।
पतंगबाजी की इतनी चिंता करने वाले अमित शाह ने दिल्ली के प्रदूषण को खत्म करने के लिए ऐसा कोई दूरगामी नजरिया सामने रखा हो, याद नहीं पड़ता। मान लें कि इसे पर्यावरण मंत्री की जिम्मेदारी माना जाए, तो क्या पतंगबाजी को संस्कृति मंत्री की जिम्मेदारी नहीं मानना चाहिए। अमित शाह के पास तो और भी बड़े महत्वपूर्ण कार्य हैं, जिन पर उन्हें ध्यान देना चाहिए। लेकिन वे दिल्ली में पतंगबाजी की चिंता कर रहे हैं और नरेन्द्र मोदी विपक्ष में बैठी कांग्रेस के लिए कह रहे हैं कि उसने विकास के काम नहीं किए इसलिए महाराष्ट्र में हार हुई। भाजपा को तो जीत मिली है, फिर नरेन्द्र मोदी काम क्यों नहीं कर रहे, ये सवाल अब पूछना जरूरी है।


