ललित सुरजन की कलम से - विश्व राजनीति के दो संकेत
'आज पश्चिम एशिया, उत्तर अफ्रीका याने अरब जगत और बहुत से अनेक देशों में जो राजनीतिक अस्थिरता व गृहयुद्ध की स्थितियां विद्यमान हैं उन्हें समझने के लिए इतिहास में जाना होगा। इनमें से अधिकतर देश उपनिवेशवाद का शिकार थे।

'आज पश्चिम एशिया, उत्तर अफ्रीका याने अरब जगत और बहुत से अनेक देशों में जो राजनीतिक अस्थिरता व गृहयुद्ध की स्थितियां विद्यमान हैं उन्हें समझने के लिए इतिहास में जाना होगा। इनमें से अधिकतर देश उपनिवेशवाद का शिकार थे।
1950 व 1960 के दशक में इन्हें स्वतंत्रता मिली भी तो वहां या तो साम्राज्यवादी शक्तियों की कठपुतली सरकारें बन गईं या फिर जनतांत्रिक परंपराओं से अनभिज्ञ कबीलाई नेताओं के हाथ में सत्ता आ गई।
जो उपनिवेशवादी ताकतें पहले से ही इन देशों के प्राकृतिक संसाधनों को लूटते आई थीं उनके लिए ऐसी व्यवस्था अनुकूल थी ताकि लूट-खसोट का व्यापार अबाध गति से चलता रहे।
इस तरह जो माहौल निर्मित हुआ उसमें हर तरह से वंचित समाज में धर्म अथवा कबीले के नाम पर आंतरिक अशांति पनपने लगी, कबीलाई मानसिकता हावी हो गई, गृहयुद्ध होने लगे और बहुत बड़ी संख्या में निरीह जनता को अपना वतन छोड़कर शरणार्थी बनना पड़ा।'
(देशबन्धु में 12 अक्टूबर 2017 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2017/10/blog-post_11.html


