ललित सुरजन की कलम से ''मोदीवाद की जीत
याद करें कि 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी की छवि को सामने रखा गया था, लेकिन तब चुनाव भारतीय जनता पार्टी के बैनर तले लड़ा गया था और भ्रष्टाचार से मुक्ति तथा देश के विकास के नाम पर वोट मांगे गए थे।

याद करें कि 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी की छवि को सामने रखा गया था, लेकिन तब चुनाव भारतीय जनता पार्टी के बैनर तले लड़ा गया था और भ्रष्टाचार से मुक्ति तथा देश के विकास के नाम पर वोट मांगे गए थे।
पिछले पांच साल में भाजपा या घटक दल का हर नेता समय-असमय एक ही नारा लगाते मिलता था- विकास, विकास, विकास। इस बार के चुनाव अभियान में विकास को तलाक, तलाक, तलाक कह दिया गया। न नरेंद्र मोदी, न अमित शाह, न किसी प्रत्याशी, और न किसी बड़े नेता ने ही विकास का नाम लिया। 23 मई की शाम को भाजपा मुख्यालय में भाषण देते हुए मोदीजी ने आम जनता की तुलना भगवान कृष्ण से की, लेकिन सच तो यह है कि मोदीजी स्वयं कृष्ण की भूमिका निभाते हुए कह रहे थे- सर्वधर्मान परित्यज्य मामेकं शरणं वृज। हे बृजवासियो, हे देशवासियो! सब कुछ छोड़कर तुम मेरी शरण में आओ। तथास्तु। अहम् ब्रम्हास्मि मोदीवाद का पहला सूत्र है।
(देशबन्धु में 30 मई 2019 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2019/05/blog-post_29.html


