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ललित सुरजन की कलम से विपक्ष : आत्ममंथन का समय

'भाकपा और माकपा से चुनावी नतीजों के विश्लेषण और आत्ममंथन के बारे में भी अभी तक कोई खबर सुनने में नहीं आई है।

ललित सुरजन की कलम से विपक्ष : आत्ममंथन का समय
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'भाकपा और माकपा से चुनावी नतीजों के विश्लेषण और आत्ममंथन के बारे में भी अभी तक कोई खबर सुनने में नहीं आई है। जिस दिन पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने वामपंथी मोर्चे को धराशायी किया था उस दिन मेरा अनुमान था कि माकपा महासचिव प्रकाश करात नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना पद छोड़़ देंगे, लेकिन वैसा कुछ नहीं हुआ। आज फिर दोनों पार्टियों के सामने विचार करने का अवसर है कि वे मतदाताओं के दिल में जगह बनाने में बार-बार क्यों फेल हो रहे हैं। यह ठीक है कि वामदल सत्ता की राजनीति नहीं करते, लेकिन इस तर्क को बहुत लंबा नहीं खींचा जा सकता। जब आप चुनाव राजनीति में भाग ले रहे हैं और बरसों-बरस प्रादेशिक सत्ता पर काबिज रहे तब कहीं न कहीं तो नैतिक जिम्मेदारी का मामला बनता ही है।'

(देशबन्धु में 19 मई 2014 को प्रकाशित)

https://lalitsurjan.blogspot.com/2014/05/blog-post_8505.html


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