ललित सुरजन की कलम से - जे एम् कोइत्जी के साहित्यिक निबंध
अपने हर निबंध को कोइत्जी ने प्रारंभ से अंत तक इसी साफ नजर और सुघड़ता के साथ बांधा है

अपने हर निबंध को कोइत्जी ने प्रारंभ से अंत तक इसी साफ नजर और सुघड़ता के साथ बांधा है। उनके कुछ अन्य निबंधों का प्रारंभ हम देखें। ग्राह्म ग्रीन पर लिखते हुए वे 1930 में ब्राइटन नामक समुद्र तट पर बसे एक आकर्षक स्थान की चर्चा करते हैं, जो ग्रीन को बेहद पसंद था।
वे लिखते हैं कि- 'ब्राइटन सैलानियों के लिए तो आकर्षक था, लेकिन उसका एक कुरूप चेहरा भी था जहां उद्योगों की धुएं से भरी थकान में भी परस्पर अविश्वास था, अपराध था और ग्रीन वहां बार-बार अपनी रचनाओं के लिए विषय खोजने अथवा प्रेरणा पाने आते थे।'
वॉल्ट ह्विटमेन के लेख की शुरूआत उस पत्र से होती है जो ह्विटमेन अगस्त 1863 में वाशिंगटन के एक अस्पताल में मृत सिपाही के परिवार को शोक संवेदना के नाते भेजते हैं- उस समय ह्विटमेन सिपाहियों के बीच एक पादरी की तरह काम कर रहे थे।
बी.एस. नॉयपाल वाले लेख के प्रारंभ में सुप्रसिद्ध लेखक सॉमरसेट मॉम की भारत यात्रा का वर्णन है कि वे 1930 की दशक में यहां आए व मद्रास के निकट महर्षि रमण के आश्रम में उनसे मिलने गए। वे वहां गर्मी के कारण कुछ देर के लिए बेहोश भी हो गए।
इसके आगे कोइत्जी वर्णन करते हैं कि इस घटना ने परवर्ती काल में नायपाल की लेखनी को किस तरह प्रभावित किया।
(अक्षर पर्व सितम्बर 2013 में प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2013/10/blog-post.html


