ललित सुरजन की कलम से कावेरी, कोडग़ू, कॉफी, कोको
'भारत की प्रमुख नदियों में से एक कावेरी नदी का उद्गम मड़िकेरी से लगभग पैंतालीस किलोमीटर दूर तालकावेरी नामक स्थान पर है।

'भारत की प्रमुख नदियों में से एक कावेरी नदी का उद्गम मड़िकेरी से लगभग पैंतालीस किलोमीटर दूर तालकावेरी नामक स्थान पर है। यह जगह लगभग अड़तीस सौ फीट ऊंचाई पर है और उसके पीछे कोडग़ू की शायद सबसे ऊंची पांच हजार फीट वाली चोटी भी है। यहीं से एक पहाड़ी झरने के रूप में कावेरी प्रकट होती है और तालकावेरी में एक छोटा-सा कुंड है जहां से वह आगे बहती है। यहां कर्नाटक सरकार ने एक सुंदर सा परिसर निर्मित कर दिया है। कावेरी कुंड में ठीक वैसे ही पूजा-अर्चना चलते रहती है जैसी अमरकंटक के नर्मदा कुंड में अथवा मुलताई के ताप्ती कुंड में। लेकिन यहां कुंड का आकार बहुत बड़ा नहीं है। कावेरी कुंड का परिसर तीन-चार तलों का है। नीचे के तल पर दर्शनार्थियों के लिए प्रसाधन की व्यवस्था भी है। इसके ठेकेदार महोदय पटना बिहार के एक सज्जन निकले। वे अपने घर से इतनी दूर यहां अकेले बैठे हुए यात्रियों की सुविधा का ख्याल करते हुए अपनी रोजी-रोटी के प्रबंध में लगे हुए थे। उन्होंने बताया कि साल में डेढ़-दो लाख की आमदनी हो जाती है।'
(देशबन्धु में 27 अगस्त 2015 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2015/08/blog-post_26.html


