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ललित सुरजन की कलम से - जेएनयू: सत्ताधीशों के इरादे?

'पुणे, हैदराबाद, शांतिनिकेतन और अब दिल्ली। पुणे के राष्ट्रीय फिल्म एवं टेलीविजन प्रशिक्षण संस्थान में एक तीसरे दर्जे के अभिनेता को शासी निकाय का अध्यक्ष बना दिया गया

ललित सुरजन की कलम से - जेएनयू: सत्ताधीशों के इरादे?
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'पुणे, हैदराबाद, शांतिनिकेतन और अब दिल्ली। पुणे के राष्ट्रीय फिल्म एवं टेलीविजन प्रशिक्षण संस्थान में एक तीसरे दर्जे के अभिनेता को शासी निकाय का अध्यक्ष बना दिया गया। यह नियुक्ति इसलिए हुई कि गजेन्द्रसिंह चौहान संघ के प्रिय हैं।

इस पर छात्रों ने लंबे समय तक ठोस कारणों से विरोध किया, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। हैदराबाद के केन्द्रीय विश्वविद्यालय में केन्द्र सरकार के सीधे हस्तक्षेप के कारण वि.वि. ने पांच दलित छात्रों को हॉस्टल से बेदखल कर दिया।

उनमें से एक रोहित वेमुला ने व्यथित और हताश होकर आत्महत्या कर ली, लेकिन इस त्रासदी का सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा। उल्टे यह सिद्ध करने की कोशिश की गई कि रोहित दलित नहीं था। इस प्रश्न का उत्तर किसी ने नहीं दिया कि उसकी शोधवृत्ति की राशि पिछले सात महीने से क्यों लंबित थी? शांतिनिकेतन में कुलपति पर अनियमितताओं के आरोप थे, उनकी रवानगी तय थी; यह सुझाव राष्ट्रपति भवन से गया था कि कुलपति से इस्तीफा मांग उसे स्वीकार कर लिया जाए। लेकिन वैसा न कर कुलपति को बर्खास्त कर एक नया इतिहास रचा गया। देश के तमाम विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को एक तरह से चेतावनी दी गई है।'

(देशबन्धु में 18 फरवरी 2016 को प्रकाशित)

https://lalitsurjan.blogspot.com/2014/02/blog-post_25.html


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