Top
Begin typing your search above and press return to search.

ललित सुरजन की कलम से - क्या अमेरिका भारत का दोस्त है?

दक्षिण अमेरिका के अधिकतर देश अभी हाल तक 'बनाना रिपब्लिक' के रूप में जाने जाते थे

ललित सुरजन की कलम से - क्या अमेरिका भारत का दोस्त है?
X

दक्षिण अमेरिका के अधिकतर देश अभी हाल तक 'बनाना रिपब्लिक' के रूप में जाने जाते थे। केले का बहुतायत उत्पादन करने वाले इन देशों की राजनीति, अर्थनीति और सैन्यनीति पर अमेरिका का ही नियंत्रण था, लेकिन इन देशों के नागरिकों ने लंबे समय तक इस दासता को स्वीकार नहीं किया। क्यूबा के फिडेल कास्त्रो से प्रेरणा लेकर इन देशों ने स्वयं को अमेरिकी प्रभाव से मुक्त किया और आगे बढ़ने के लिए अपना रास्ता खुद तय करना शुरू किया। इसके लिए उन्होंने अनगिनत कुर्बानियां भी दीं, लेकिन इसके विपरीत भारत में क्या हो रहा है? इस देश के नौजवान आईआईटी, आईआईएम और अन्य संस्थाओं से पढ़कर अमेरिका की ओर भागे जा रहे हैं कि मानो मुक्ति वहां जाकर ही मिलेगी। जिनके पास ज़्यादा साधन है वे तो अपने बच्चों की पढ़ाई अमेरिका में ही करवाते हैं। ये जब कभी हिन्दुस्तान आते हैं तो आते साथ बीमार पड़ जाते हैं। इन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि अमेरिका ने एक राजनीतिक शक्ति के रूप में भारत के साथ कैसा व्यवहार किया है। दूसरे शब्दों में, इस स्वार्थी समाज के लिए देश कोई मायने नहीं रखता, अपनी सुख-सुविधा ही इनके लिए सर्वोपरि है। श्रीकांत वर्मा की एक प्रसिध्द कविता पंक्ति है - 'दोस्तो! देश को खोकर प्राप्त की है मैंने कविता'। इस पंक्ति को बदलकर कहना होगा कि-'हिंदुस्तानियों! देश को खोकर मैंने प्राप्त की है अमेरिका की चाकरी।'

(देशबन्धु में 02 जनवरी 2014 को प्रकाशित)

https://lalitsurjan.blogspot.com/2014/01/blog-post_1.html


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it