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ललित सुरजन की कलम से - इतिहास बनाम डॉ. सिंह

'मेरे विचार में श्रीमती गांधी इस बात को नहीं समझ पाईं कि सिर्फ लोक-लुभावन कार्यक्रमों से राजनीति नहीं चलती

ललित सुरजन की कलम से - इतिहास बनाम डॉ. सिंह
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'मेरे विचार में श्रीमती गांधी इस बात को नहीं समझ पाईं कि सिर्फ लोक-लुभावन कार्यक्रमों से राजनीति नहीं चलती। नीतियों और कार्यक्रमों को जनता के बीच पहुंचाने के लिए कांग्रेस पार्टी को निष्ठावान व समर्पित कार्यकर्ताओं की बेहद जरूरत थी। इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में जब भ्रष्टाचार के आरोप लगना शुरू हुए तो कांग्रेस अपना बचाव भी ठीक से नहीं कर पाई। कांग्रेस अध्यक्ष को चाहिए था कि 2011 में एक के बाद एक घोटालों की खबर आने के बाद वे डॉ. मनमोहन सिंह से इस्तीफा देने का अनुरोध करतीं और उनके स्थान पर ए.के. एंटोनी या प्रणब मुखर्जी को प्रधानमंत्री बनाया जाता। डॉ. सिंह को भी दीवार पर लिखी इबारत पढ़ना चाहिए थी। वे खुद इस्तीफे की पेशकश करते तो इससे बेहतर कुछ नहीं होता।'

(देशबन्धु में 20 फरवरी 2014 को प्रकाशित)

https://lalitsurjan.blogspot.com/2014/02/blog-post_21.html


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