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ललित सुरजन की कलम से हिमाचल प्रदेश- अंतिम: स्वर्ग से वापस धरती पर

राष्ट्रपति निवास में एक प्रशस्त उद्यान है। इसके भीतर एक गुलाब वाटिका भी है, जिसमें कोई सौ किस्म के गुलाब थे।

ललित सुरजन की कलम से हिमाचल प्रदेश- अंतिम: स्वर्ग से वापस धरती पर
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राष्ट्रपति निवास में एक प्रशस्त उद्यान है। इसके भीतर एक गुलाब वाटिका भी है, जिसमें कोई सौ किस्म के गुलाब थे। इसके बीचोंबीच मोइनजोदड़ो से प्राप्त नृत्य करती युवती की प्रतिमा की लोहे से निर्मित एक कलात्मक अनुकृति है। यह अनुकृति रेल की पांत के दो टुकड़ों के सहारे खड़ी की गई है। वह इस बात का प्रतीक है कि मोइनजोदड़ो की खोज एक रेलवे इंजीनियर ने की थी। कलाकार सुबोध केरकर ने यह कृति बनाई है। उनका कहना है कि मोइनजोदड़ो एक ओर हमें भारत उपमहाद्वीप के प्राचीन इतिहास से जोड़ता है; दूसरी ओर वह स्थान चूंकि अब सिंध और पाकिस्तान में चला गया है इसलिए बंटवारे की भी याद दिलाता है। इस बगीचे में एक वृक्ष है जिसे बाकायदा विरासत वृक्ष के रूप में नामांकित किया गया है। यह डेढ़ सौ वर्ष पुराना वृक्ष पीपल की प्रजाति का दुर्लभ यलो पॉप्लर है।

(देशबन्धु में 28 सितम्बर 2017 को प्रकाशित)

https://lalitsurjan.blogspot.com/2017/09/blog-post_27.html


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