ललित सुरजन की कलम से- देशबन्धु: चौथा खंभा बनने से इंकार- 9
1950 के दशक में नागपुर से 'प्रतिभा' शीर्षक एक बेहतरीन साहित्यिक पत्रिका प्रकाशित होती थी, जिसमें संपादक के रूप में वीरेंद्र कुमार तिवारी का नाम छपता था।

1950 के दशक में नागपुर से 'प्रतिभा' शीर्षक एक बेहतरीन साहित्यिक पत्रिका प्रकाशित होती थी, जिसमें संपादक के रूप में वीरेंद्र कुमार तिवारी का नाम छपता था। तिवारी जी आगे चलकर मध्यप्रदेश में लंबे समय तक कांग्रेस विधायक दल के सचिव का दायित्व संभालते रहे। वीरेंद्र दादा को कांग्रेस के सभी खेमों में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था। प्रतिभा में हर माह मुखपृष्ठ पर रायपुर के कलाकार कल्याण प्रसाद शर्मा की लोक जीवन पर आधारित बहुरंगी पेंटिंग प्रकाशित होती थी। यदि मेरी जानकारी सही है तो तिवारी जी एवं शर्मा जी दोनों विद्याचरण शुक्ल के सहपाठी थे। श्री शुक्ल की बड़ी बेटी का नाम भी प्रतिभा था। पत्रिका में शुक्लजी का नाम छपता था या नहीं यह मुझे ध्यान नहीं है। इतना अवश्य याद है कि वर्धा रोड पर प्रतिभा प्रेस की एक बंगलेनुमा इमारत थी। आज उस जगह पर लोकमत के कॉर्पोरेट मुख्यालय का बहुमंजिला भवन खड़ा है।
(देशबन्धु में 6 अगस्त 2020 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2020/08/9_6.html


