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ललित सुरजन की कलम से सरकार गिरने-टिकने के आगे

'पिछले एक सप्ताह के घटनाचक्र के दौरान पाठकों का ध्यान भारतीय जनता पार्टी के उस बयान की ओर भी गया होगा

ललित सुरजन की कलम से सरकार गिरने-टिकने के आगे
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'पिछले एक सप्ताह के घटनाचक्र के दौरान पाठकों का ध्यान भारतीय जनता पार्टी के उस बयान की ओर भी गया होगा जिसमें उसने खुदरा बाजार के एफडीआई के मामले पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। यह एक हास्यास्पद, अतार्किक और अवास्तविक मांग थी।

जिस भाजपा ने संसद का पूरा का पूरा मानसून सत्र नहीं चलने दिया वह एक खास मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाने की मांग करे तो इसे और क्या कहा जाए? इसी तरह कुछ एक नेताओं ने मनमोहन सिंह को चुनौती दी है कि वे विश्वास मत हासिल करके दिखाएं। यह मांग भी उतनी ही बेढब है।

विपक्ष के सामने पर्याप्त अवसर था कि वह कोयला घोटाले पर संसद में खुली बहस कर सरकार की नाक में दम कर देता।'

(देशबन्धु में 27 सितम्बर 2012 को प्रकाशित)

https://lalitsurjan.blogspot.com/2012/09/blog-post_29.html


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