ललित सुरजन की कलम से भाषण और आंकड़ों से परे
'छत्तीसगढ़ की रमन सरकार ने पंचायत शिक्षकों का संविलियन कर शिक्षकों का स्थायी कैडर निर्मित करने का फैसला लिया है।

'छत्तीसगढ़ की रमन सरकार ने पंचायत शिक्षकों का संविलियन कर शिक्षकों का स्थायी कैडर निर्मित करने का फैसला लिया है। कुछ ऐसा ही फैसला मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने भी लिया है। मेरा शुरू से मानना रहा है कि जब तक स्कूलों में पूर्णकालीन और प्रशिक्षित शिक्षक नहीं होंगे तब तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हो सकता।
वर्ल्ड बैंक के इशारे पर स्थायी शिक्षकों का कैडर धीरे-धीरे कर पूरे देश में समाप्त कर दिया गया। इससे शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा मिला। आज अगर वह स्थिति बदलती है तो स्वागत योग्य है। छत्तीसगढ़ सरकार को इस बारे में एक समन्वित दीर्घकालीन नीति बनाकर लागू करना चाहिए।
उच्च शिक्षा में भी विसंगतियां व्याप्त हैं। उन पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। लेकिन इसके साथ-साथ शाला भवन, उपकरण, पुस्तकालय, खेल का मैदान, इन सब पर ध्यान देना भी उतना ही आवश्यक है। दिल्ली का मॉडल यहां शायद काम आ सकता है!'
(देशबन्धु में 05 जुलाई 2018 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2017/08/blog-post_9.html


