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ललित सुरजन की कलम से - परीक्षा की एक और घड़ी
'हिन्दुस्तान को अपनी सहिष्णुता की परम्परा पर बहुत गर्व रहा है

'हिन्दुस्तान को अपनी सहिष्णुता की परम्परा पर बहुत गर्व रहा है। हम बताते हैं कि यही एकमात्र देश है जहां यहूदियों पर अत्याचार नहीं हुए, यही देश है जहां पारसियों को आश्रय मिला, यहां जो विदेशी आए वे भी यहां के रंग में रंग गए।
हमने अंग्रेजी राज के खिलाफ लड़ाई लड़ी, लेकिन अंग्रेजों से घृणा नहीं की। मुहम्मद अली जिन्ना ने अपनी महत्वाकांक्षा के चलते पाकिस्तान तो बनवा लिया, लेकिन हिन्दुस्तान के अधिकतर मुसलमानों ने पाकिस्तान जाना कुबूल नहीं किया। आज जो कुछ हो रहा है उसे इस पृष्ठभूमि में देखने और समझने की जरूरत है।'
(देशबन्धु में 18 अगस्त 2012 को प्रकाशित विशेष सम्पादकीय)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2012/08/blog-post_17.html
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