ललित सुरजन की कलम से देशबन्धु: चौथा खंभा बनने से इंकार- 11
वी.सी. दिल्ली से रायपुर आए। कलेक्टर, एसपी, उनकी अगवानी के लिए विमानतल पर मौजूद थे।

रायपुर का एक कुख्यात गुंडा फरार चल रहा था। शायद हो कि उनके ही संरक्षण में छुपा हो! सरबजीत सिंह जिला पुलिस अधीक्षक यानी कि एसपी थे। वी.सी. दिल्ली से रायपुर आए। कलेक्टर, एसपी, उनकी अगवानी के लिए विमानतल पर मौजूद थे। वह गुंडा भी कहीं से प्रकट हुआ। 'भैया' को माला पहनाने आगे बढ़ा। तभी शुक्ल जी ने सबको सुनाते हुए कहा- एसपी साहब, यह रहा आपका अपराधी। सारे उपस्थित लोग सुनकर अवाक रह गए। गुंडे को ऐसा संरक्षण! कानून की ऐसी अवज्ञा! इस मौके पर एसपी करते भी तो क्या करते? उन्होंने व्यथित हृदय से जल्दी ही रायपुर से अपना तबादला भोपाल करवा लिया। इसी रायपुर विमानतल पर एक और दृश्य हमने देखा जब उनके कृपापात्र नवनियुक्त कुलपति रामकुमार पांडे ने सबके सामने उनके चरणस्पर्श किए। पुराने लोगों को याद आया कि द्वारिका प्रसाद मिश्र के समय रायपुर के प्रथम कुलपति डॉ बाबूराम सक्सेना ने सीएम की अगवानी हेतु विमानतल जाने से इंकार कर दिया था। उन्हें कोई चर्चा करना होगी तो सर्किट हाउस बुला लेंगे।
(देशबन्धु में 20अगस्त 2020 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2020/08/11.html


