ललित सुरजन की कलम से कांग्रेस: ठोस कदम उठाने की जरूरत
'कांग्रेस भले ही देश की सबसे पुरानी पार्टी हो, लेकिन उसके शीर्ष नेतृत्व को याद रखना चाहिए कि बदलते हुए समय के साथ नए औजारों की भी जरूरत होती है।

'कांग्रेस भले ही देश की सबसे पुरानी पार्टी हो, लेकिन उसके शीर्ष नेतृत्व को याद रखना चाहिए कि बदलते हुए समय के साथ नए औजारों की भी जरूरत होती है। जिस तरह से गद्दे-तकिए वाली बैठकों की जगह टेबल-कुर्सी ने ले ली है वैसे नए वातावरण में और क्या आवश्यकताएं हैं यह समझना कांग्रेस के लिए बेहद जरूरी है।
हम याद दिलाना चाहेंगे कि आज के दौर में वांछित हो या अवांछित, मीडिया राजनीति में एक बड़ी हद तक हस्तक्षेप कर रहा है। इसके लिए कांग्रेसजनों का मीडिया से बातचीत करने का तौर-तरीका बदलना आवश्यक नहीं बल्कि अनिवार्य है। मीडिया का जो वर्ग कांग्रेस हितैषी है वह भी परेशान है कि कांग्रेस के शीर्ष नेता मीडिया से दूरी बनाकर रखते हैं। इसमें कांग्रेस का जो नुकसान हुआ है उसका आकलन शायद तीनों बड़े नेताओं ने नहीं किया।'
'इस तथ्य को जानकर कांग्रेस को अपने सारे वर्तमान प्रवक्ताओं को टीवी के परदे से हटा लेना चाहिए। जब भाजपा के प्रवक्ता प्रहार करते हैं और सूत्रधार उनका साथ देते हैं तब संजय झा जैसे प्रवक्ताओं को समझ ही नहीं आता कि वे क्या बोलें।'
(देशबन्धु में 16 जनवरी 2014 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2014/01/blog-post_15.html


