Begin typing your search above and press return to search.
ललित सुरजन की कलम से अटल: संघ के होकर संघ से दूर
हिन्दी क्षेत्र में दो ऐसे राजनेता हुए हैं जिनका लेखकों, पत्रकारों और अकादमिकों से जीवंत संवाद रहा है।

हिन्दी क्षेत्र में दो ऐसे राजनेता हुए हैं जिनका लेखकों, पत्रकारों और अकादमिकों से जीवंत संवाद रहा है। डॉ. राम मनोहर लोहिया अपने इसी गुण के कारण हिन्दी जगत में लोकप्रिय और प्रतिष्ठित हुए। उनके संबंध अन्य भारतीय भाषाओं के संस्कृतिकर्मियों के साथ भी घनिष्ठ थे। अटल बिहारी वाजपेयी का रास्ता भी लगभग यही था। वे जब प्रधानमंत्री थे तब हिन्दी लेखकों के अलावा अली सरदार जाफरी व जावेद अख़्तर जैसे लोकप्रिय साहित्यकारों के साथ उनकी संगत के समाचार पढ़ने में आते थे। वे जब ग्वालियर में विद्यार्थी थे तब शिवमंगल सिंह सुमन उनके अध्यापक थे और वाजपेयी जी ने भिन्न राजनीतिक विचार होने के बावजूद अपने इस गुरु का अंत तक सम्मान ही किया।
(देशबन्धु में 23 अगस्त 2018 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2018/08/blog-post_22.html
Next Story


