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एआई सिटी और भविष्य का उत्तर प्रदेश

एआई प्रज्ञा योजना के अंतर्गत लगभग 10 लाख युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रशिक्षण दिया जाएगा और राज्य में 30000 करोड़ से अधिक का निवेश डाटा सेंटर और एआई आधारित बुनियादी ढांचे के लिए किया जा रहा है।

एआई सिटी और भविष्य का उत्तर प्रदेश
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(डॉ ऋतु दुबे तिवारी)। कहा जाता है की डाटा भविष्य का ईधन है यानि आने वाले भविष्य में उस देश का वर्चस्व होगा जिसके पास अपना डाटा भंडारण और अपनी तकनीक होगी। एआई अब सीमित नहीं है स्वास्थ्य ,कला, शिक्षा, सुरक्षा , ट्रांसपोर्ट और प्रशासन में डिजीटल तकनीकी आदि लगभग हर क्षेत्र में इसका आधिपत्य बढ़ता जा रहा है। एआई का ज्ञान रखने वाले युवा देश के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एआई सिटी लखनऊ एवं नोएडा विकसित करने की योजना पर काम कर रही है इससे राज्य को तकनीकी रूप से मजबूत और सशक्त बनाया जा सकेगा। एआई प्रज्ञा योजना के अंतर्गत लगभग 10 लाख युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रशिक्षण दिया जाएगा और राज्य में 30000 करोड़ से अधिक का निवेश डाटा सेंटर और एआई आधारित बुनियादी ढांचे के लिए किया जा रहा है।इस योजना के तहत इन युवाओं में न सिर्फ युवा, विद्यार्थी बल्कि महिलाएं किसान,गांव के मुखिया स्वयं सहायता समूह में काम करने वाले लोग, पब्लिक सेक्टर से जुड़े लोग ऑपरेटर्स और आम लोग भी शामिल होंगे। यह कौशल निर्माण करने का कार्य न सिर्फ नवाचारों को बढ़ावा देने वाला होगा बल्कि विकसित उत्तर प्रदेश की तरफ एक महत्वपूर्ण कदम की तरह याद रखा जाएगा।

समय की मांग

यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश को डिजिटल इंडिया और आधुनिक तकनीक का एक प्रमुख केंद्र बनाने के लिए बहुत प्रभावी सिद्ध हो सकती है।यह बात स्पष्ट है कि आने वाला समय प्रभावी रूप से आईटी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा टेक्नोलॉजी पर मजबूत पकड़ रखने वाले देश का होगा।आज एआई और डाटा सेंटर आधुनिक तकनीक की रीढ़ बन चुके हैं और इनके माध्यम से बड़े स्तर पर डेटा को प्रोसेस किया जा रहा है और स्मार्ट फैसले लेने में मदद मिल रही है।


प्रदेश की डाटा सेंटर नीति के तहत 5 हाइपर स्केल डाटा सेंटर पार्कों का उपयोग शुरू किया जा चुका है। आज सारी सरकारों को यह भली-भांति ज्ञात है कि बिना एआई प्रशिक्षण के देश को स्थाई बेहतरीन देना संभव नहीं है और वह इस दिशा में कार्य कर रही हैं।

करियर की संभावनाएं

एआई डाटा साइंस, मशीन लर्निंग साइबर सिक्योरिटी क्लाउड कंप्यूटिंग आदि के क्षेत्र में युवाओं की मांग बहुत तेजी से बढ़ने की संभावना रहेगी, वहीं स्थानीय स्तर पर बड़ी कंपनियां आएंगी और लोगों को बिना दूर जाए अपने ही राज्य में रोजगार की संभावनाएं बढ़ जाएगी। इन संभावनाओं में न सिर्फ स्टार्टअप, रिसर्च, इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि लोग और बेहतर तरीके से काम करने के लिए प्रेरित होंगे ,कुल मिलाकर एआई सिटी युवाओं के करियर को नई दिशा देने का काम करेगी।

भविष्योन्मुखी कदम

उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम भविष्य की तरफ देखने वाला कदम रहेगा इस प्रकार की योजना से न सिर्फ कौशल विकास होगा बल्कि रोजगार का भी सृजन किया जा सकेगा,बुनियादी ढांचे पर काम किया जा सकेगा,निवेश किया जा सकेगा और आने वाले समय में यह एक बहुत सशक्त और दूरदर्शी योजना साबित होगी जिसका न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश निर्माण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2025 को टेक्नोलॉजी एआई और डाटा में नए मानक स्थापित करने के लिए याद किया जाएगा आज जिस रणनीति पर काम किया जा रहा है उसमें युवाओं के योगदान का स्पष्ट रूप से आकलन किया जा सकता है।

युवाओं को मुख्यमंत्री ने ज्ञानदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया जिसमें उनके आसपास पढ़ रहे कम से कम पांच बच्चों को कंप्यूटर के प्रति जागरूक बनाने का कार्य किया जाएगा।निसंदेह 2026 यूपी के लिए एक निर्णायक वर्ष साबित होगा और आने वाले समय में एआई और डिजिटल टेक्नोलॉजी में उत्तर प्रदेश को एक वैश्विक केंद्र की तरह याद रखा जाएगा।





(लेखिका शिक्षाविद एवं साइबर विशेषज्ञ हैं)


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