ललित सुरजन की कलम से तपती धूप में सड़क का सफर
'बाराबंकी (उ.प्र.) के लोकसभा सदस्य बेनीप्रसाद वर्मा केंद्रीय संचार मंत्री बने तो उन्होंने अपने क्षेत्र में स्थित अनूठे 'कल्पवृक्ष' पर डाक टिकिट जारी करवा दिया था।

'बाराबंकी (उ.प्र.) के लोकसभा सदस्य बेनीप्रसाद वर्मा केंद्रीय संचार मंत्री बने तो उन्होंने अपने क्षेत्र में स्थित अनूठे 'कल्पवृक्ष' पर डाक टिकिट जारी करवा दिया था। देखें कि मुख्यमंत्री कमलनाथ का ध्यान अपने गृहक्षेत्र की इस अनूठी धरोहर पर कब जाता है! इसी परिसर में एक बावली भी है जो शायद दो सौ साल पुरानी होगी। बड़चिचोली के बरगद की एक और खासियत है जो आज के दौर में खासे मायने रखती है। यहां एक सूफी संत की मजार है, जिस पर हर साल उर्स भरता है। उस मजार के बाजू में ही हनुमानजी का मंदिर भी है। इस मजार व उर्स के संरक्षक व सहयोगी आसपास के गांवों के सभी धर्मों व वर्गों के नागरिक हैं। उसमें कोई भेदभाव नहीं है। पहले मजार छोटे रूप में थी, उत्साही भक्तों के सहयोग से अब उसका विस्तार हो रहा है। इससे वटवृक्ष के प्राकृतिक सौंदर्य पर असर पड़ रहा है, लेकिन यह भक्तिभाव कहां नहीं है? रायपुर के निकट चंपारन में महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली में कभी जो नैसर्गिक वन होता था, उसकी शोभा कांक्रीट के बढ़ते जंगल के कारण नितदिन नष्ट हो रही है।'
(देशबन्धु में 20 जून 2019 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2019/06/blog-post_20.html


