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ललित सुरजन की कलम से भागमभाग के बीच कुछ बातें

'प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन के दो दिवसीय कार्यक्रम में हमने कॉलेज के विद्यार्थियों से इसी तर्ज पर बात की।

ललित सुरजन की कलम से भागमभाग के बीच कुछ बातें
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'प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन के दो दिवसीय कार्यक्रम में हमने कॉलेज के विद्यार्थियों से इसी तर्ज पर बात की। अमृतलाल नागर का यह जन्मशती वर्ष है। एक तो उनकी एक प्यारी सी कहानी है 'हाजी कुल्फीवाला' उसका पाठ एक विद्यार्थी ने किया। प्रेमचंद तो डायमंड्स आर फॉरएवर की तरह सदा के लिए हैं। उनकी कहानी 'नशा' का पाठ भी एक विद्यार्थी ने किया। कुछ अन्य कहानियों और कविताओं की भी प्रस्तुति दो दिनों में हुई। इन पर वरिष्ठ लेखकों और विद्यार्थियों के बीच खुलकर बातचीत हुई। विद्यार्थी पाठ्यक्रम के बाहर निकलकर साहित्य को उसकी व्यापकता पर पहचानें और समझें, उसकी पहल हुई। अंबिकापुर के अलावा आसपास के अनेक स्थानों से आए शिविरार्थियों के साथ ऐसी खुली चर्चा करना एक सुखद अनुभव था जिसकी सार्थकता समय सिद्ध करेगा।'

(देशबन्धु में 14 जुलाई 2016 को प्रकाशित)

https://lalitsurjan.blogspot.com/2016/07/blog-post_16.html


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