रहस्यों से भरा है पनकला नरसिम्हा स्वामी मंदिर, प्रतिमा पी जाती है कई लीटर मीठा पानी!
विज्ञान और अध्यात्म को लेकर हमेशा तर्क-वितर्क की स्थिति रहती है। जहां विज्ञान चमत्कारों को नकारता है, वहीं अध्यात्म इसे भगवान की उपस्थिति करार देता है।

नई दिल्ली। विज्ञान और अध्यात्म को लेकर हमेशा तर्क-वितर्क की स्थिति रहती है। जहां विज्ञान चमत्कारों को नकारता है, वहीं अध्यात्म इसे भगवान की उपस्थिति करार देता है।
देशभर में ऐसे कई मंदिर हैं, जहां ऐसे चमत्कार देखने को मिलते हैं जिनके पीछे का रहस्य खुद विज्ञान भी नहीं जान पाया है। आज आपको ऐसे ही मंदिर के बारे में बताएंगे, जहां गर्भगृह में मौजूद प्रतिमा सारा पानी पी जाती है और किसी को नहीं पता है कि भोग के रूप में प्रयोग किए जाने वाला पानी कहां जाता है।
दक्षिण भारत को अध्यात्म की धरती माना जाता है, जहां भगवान शिव, विष्णु से लेकर नरसिम्हा भगवान के कई मंदिर मौजूद हैं। आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के मंगलगिरी में भगवान नरसिम्हा को समर्पित पनकला नरसिम्हा स्वामी मंदिर है, जो खुद में कई रहस्य समेटे हुए है। इस मंदिर में भगवान नरसिम्हा की पत्थर की बड़ी ही प्रतिमा विराजमान है, जो भोग के रूप में मीठा पानी पीती है।
भक्त शंख के माध्यम से प्रतिमा को गुड़ का मीठा पानी पिलाते हैं, और जब पानी पिलाया जाता है तो गड़गड़ की आवाज आती है, जैसे कोई पानी को गटक रहा हो। प्रतिमा को पिलाया गया पानी कहां जाता है, ये किसी को नहीं पता। खास बात ये भी है कि मंदिर में मौजूद नरसिम्हा भगवान की प्रतिमा का मुंह धातु से बना है। मुंह के अंदर शंख की सहायता से मीठा पानी अर्पित किया जाता है। मुंह के अंदर पानी डालने के बाद कुछ पानी बाहर भी निकलता है, जिसे भक्त प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
प्रतिमा पर न तो मीठे पानी के निशान पड़ते हैं और न ही पत्थर पानी को सोखने की क्षमता रखता है। पानी के रहस्य का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक भी मंदिर का दौरा कर चुके हैं, लेकिन इस रहस्य को कोई जान नहीं पाया। इतना ही नहीं, मंदिर में मीठा पानी चढ़ाने की प्रथा काफी समय से चली आई है, लेकिन फिर भी मंदिर में एक भी चींटी देखने को नहीं मिलती है।
स्थानीय लोगों के बीच मान्यता है कि मंदिर ज्वालामुखी की पहाड़ी पर स्थित है और भगवान नरसिम्हा को अर्पित किया जाने वाला मीठा पानी ज्वालामुखी के तेज को कम करता है और ज्वालामुखी को फटने से रोकता है। भक्त इसे भगवान का चमत्कार ही मानते हैं कि आज तक ज्वालामुखी फटा नहीं है।


