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शैतानो की कांफ्रेंस

शैतानो के सरदार इब्लीस ने अल्प सूचना पर शैतानो की आपातकाल बैठक बुलाई।

शैतानो की कांफ्रेंस
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मूल लेखक - हाशिम अज़ीमाबादी

शैतानो के सरदार इब्लीस ने अल्प सूचना पर शैतानो की आपातकाल बैठक बुलाई। सूचना पर दुनियां के कोने कोने से शैतान बैठक में शामिल होने के लिए पहुचे। बैठक स्थल किस्म किस्म के शैतानो से भर गया। जैसे ही इब्लीस बैठक में पहुचा सभी शैतानो ने खड़े होकर उसका स्वागत किया। आते ही इब्लीस ने बिना समय खराब करे सभा को संबोधित किया -

मेरे प्यारे शैतानो।

आप सब को एक साथ इतनी बड़ी संख्या में देख कर मेरे को हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। लम्बी अवधि के बाद हम सब का एक दूसरे से मिलना हो रहा है। सब से ज़्यादा संतोष इस बात पर है कि मेरी एक आवाज़ पर दुनियां के कोने कोने से शैतान खीचे चले आये है।

मेरे को अभी अभी बताया गया कि मेरे इस अचानक बुलावे पर मेरे साथियों में यह चर्चा हो रही है कि इस तरह यकायक बैठक बुलाने की ज़रूरत क्यों पड़ी ? क्या करू मेरे पास इतना समय ही नहीं था कि सलाह मशविरा कर बकायदा एक एक को निमंत्रण पत्र भेज कर आमंत्रित करता। खैर मै अब अपने जान से प्यारे प्रिय शैतानो को यहां बुलाने के उद्धेश्य की जानकारी देता हूं। साथियों हालांकि मेरे को आप लोगो की कार्यक्षमता पर ज़रा भी शक नहीं है लेकिन न जाने क्यों मेरे को ऐसा लग रहा है कि मेरा पूरा नेटवर्क ध्वस्त हो गया है , हम शैतान बरादरी वाले अपने उद्धेश्य को भूल गए है। मै पूछना चाहता हूं क्या अब आप लोगो में पहले जैसा जोश नहीं रहा , आखिर क्या वजह है कि हफ्तों बीत जाते है और मेरे शैतान भाइयों की तर$फ से ऐसा कोई समाचार मिलता ही नहीं जिसे सुन कर दिल खुश हो जाये। मै चाहता हूं कि अपने अपने जिले के प्रमुख शैतान मेरे को बताये कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है।

इब्लीस की बात सुन कर एक शैतान खड़ा हुआ और उसने अपनी बात यूं शुरू की -

आदरणीय प्रात: स्मरणीय शैतानो के सरदार श्री इब्लीस महोदय एवं आमंत्रित सभी छोटे बड़े शैतानो। अभी हमारे प्रमुख ने हमारी कार्यक्षमता पर सवाल उठाये। मै प्रमुख को विश्वास दिलाता हूं कि यह सब इंसानों के द्धारा फैलाई गई अफवाह है आप इस ओर ज़रा भी ध्यान नहीं दे। हमारे जिम्मे इंसानों को रास्ते से भटकाने का जो काम है उसे हम पूरी जि़म्मेदारी और निष्ठा से अंजाम दे रहे है। शायद हमारी कारगुज़ारी आप तक ठीक से पहुच नहीं रही है इसलिए सरकार ख़$फा नज़र आ रहे है। महोदय आपके आशीर्वाद से मानव मानवता से जिस तरह दूर होता जा रहा है वह प्रशंसनीय है। श्रीमान मेरे जिम्मे इंसानों के बीच शक और न$फरत फैलाना है लेकिन यह आपके किये गए परिश्रम का ही परिणाम है कि मै जिस घर में जाता हूं शक और न$फरत वहां पहले से ही मौजूद है। पति पत्नी में विश्वास नहीं , भाई भाई में प्रेम नहीं , बाप बेटे में पटती नहीं। आपके आशीर्वाद से शैतान के सभी काम इंसान स्वत: कर रहा है। आप निश्चित रहे हमारे मिशन में कही कोई रुकावट नहीं है।

समय के अभाव के कारण सब शैतानो को बोलने का अवसर देना संभव नहीं था सो इब्लीस ने पूरे मजमे पर नज़र घुमाई और एक शैतान की और उंगली दिखा कर कहा - तुम अपनी रिपोर्ट बताओ।

उसने अपनी बात शुरू किया -

मैंने आदमी का मुआयना किया तो पाया कि आदमी के शरीर में दो हाथ है। मेरे को उसके ये दो हाथ बहुत परेशान कर रहे थे। मै उसके इन दोनों हाथो को निष्क्रिय कर देना चाहता था। आप तो जानते है एक बार शैतान ने कुछ ठान लिया तो फिर जब तक उसे अंजाम नहीं दे देता चैन से नहीं बैठता है। आखिरकर इंसानों के युवा वर्ग के एक हाथ में गुटका और दूसरे हाथ में ताश की गड्डी पकड़ाने में मै कामयाब हो गया। जब से उसके मुंह में गुटका गया है उसने बोलना बंद किया है अब बस उसका एक ही काम है थूकना। थूकदान को छोड़ ऐसी कोई जगह नहीं बची है जहां इसने थूका न हो। ताश की गड्डी ने इसको घर परिवार काम धंधे से दूर कर दी है। अब ये रोज़ जीतने की उम्मीद में हार रहा है। सिर्फ पैसे ही नहीं हार रहा है बल्कि भरोसा भी हार रहा है , रिश्ते भी हार रहा है , सम्मान भी हार रहा है , स्नेह भी हार रहा है।

इसके बाद शैतानो के सरदार ने मजमे पर नज़र डाली और एक शैतान को अपनी बात कहने के लिए आमंत्रित किया। उस शैतान ने माइक संभाला और शुरू हो गया-

आदरणीय अध्यक्ष महोदय एवं दूर दराज़ से आये मेरे शैतान भाइयो।

अभी मेरे फाजि़ल दोस्त ने गुटका और ताश की बात की। मै स्वीकारता हूं कि हमारी यह खोज हमारे मकसद को पूरा करने में बहुत सहायक सिद्ध हुई है लेकिन यह तकनीक अब पुराने ज़माने की बात हो गई गई। अभी हमारे सदर इब्लीस साहब ने जो चिंता प्रगट की है उस चिंता की कोई ज़रूरत नहीं है। मै पूछता हूं हमारा उद्धेश्य था क्या ? इंसान को ज्ञान से दूर करना , शिक्षा से वंचित करना , धर्म से अलग करना। हम यही चाहते थे कि इंसान मेहनत न करे , सृजन न करे , तरक्की न करे। महोदय इंसान के हाथ में अब मोबाईल आ गया है। अब इंसान को बस रोज़ का डेढ़ जी.बी. डाटा मिल जाये तो उसे न दुकान जाना है न नौकरी करनी है , प्रवचन में जाना है न दिगर सामाजिक आयोजन में। अब उसे न शिक्षा की चिंता है न धर्म की ​िफकर। सुबह उठता है तो पहले हाथ में मोबाईल लेता है फिर रात तक नोटिफिकेशन चैक करता रहता है और रात को सिर के सिराहने मोबाईल रख कर सो जाता है। इसके अलावा अब उसे और कोई काम नहीं करना है। आदरणीय मै तो कहता हूं आप चिंता क्यों करते है चिंता तो ख़ुदा को करना चाहिए कि उसके बन्दों को क्या हो गया ? यह आपके कुशल प्रबंधन का कमाल है कि आज इंसान विज्ञान के आविष्कारो का सदुपयोग नहीं दुरूपयोग कर रहा है।

आप तो जश्न मनाईये जश्न।

इन बातो को सुन शैतान संतुष्ट हो गया। उसने उपस्थित शैतानो के प्रति आभार प्रगट करते हुए कांफ्रेंस की समाप्ति की घोषणा की।


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