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सेना प्रमुख की धमकी के बाद कश्मीर में बवाल

श्रीनगर ! क्या अब सेना के जवान कश्मीर में विरोध प्रदर्शन करने वालों तथा पत्थरबाजों पर सीधे गोली चलाते हुए कानून-व्यवस्था को भी संभालेंगें।

सेना प्रमुख की धमकी के बाद कश्मीर में बवाल
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सुरेश एस डुग्गर

क्या अब सेना के जवान प्रदर्शनकारियों पर भी सीधे गोली चलाएंगें?

श्रीनगर ! क्या अब सेना के जवान कश्मीर में विरोध प्रदर्शन करने वालों तथा पत्थरबाजों पर सीधे गोली चलाते हुए कानून-व्यवस्था को भी संभालेंगें। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के बयान के बाद कश्मीर में यह सबसे बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। हालांकि उनके बयान ने कश्मीर में बवाल भी खड़ा कर दिया है क्योंकि कश्मीरियों पर सीधे गोली चलाने की अप्रत्यक्ष धमकी और चेतावनी के बाद कई राजनीतिक दल उनके विरोध में उठ खड़े हुए हैं।
तीन दिनों के भीतर सेना के 6 जवानों की आतंकियों से हुई मुठभेड़ों में हुई मौतों ने सेना को झकझौर कर रख दिया। यही कारण था कि गुस्साए सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने उन तत्वों को धमकी भरी चेतावनी भी जारी कर दी जो पिछले करीब एक साल से कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में रोड़े पैदा कर रहे हैं। सेना प्रमुख की चेतावनी कहती थी कि आतंकवाद विरोधी अभियानों में रोड़ा अटकाने वालों के साथ ही आईएसआईएस और पाकिस्तानी झंडे लहराने वालो के साथ सख्ती के साथ निपटा जाएगा। रक्षाधिकारियों के मुताबिक, स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबल ऐसे तत्वों से निपटने मेंं नाकाम हो रहे हैं जो मुठभेड़स्थलों पर विरोध प्रदर्शन तथा पथराव कर आतंकियों को भागने में अप्रत्यक्ष तौर पर मदद कर रहे हैं। याद रहे मुठभेड़स्थलों पर पथराव करके सेना के जवानों का ध्यान बंटा कर तथा उनके काम में रोड़ा अटकाने से सेना के कई जवान मारे जा चुके हैं और दर्जनों खंूखार आतंकी घेरे से भाग निकलने में कामयाब हो चुके हैं। यह आतंकियों तथा आईएसआई की नई रणनीति है जिसे सीमा पार से मिले निर्देशों के बाद पिछले साल के आरंभ से ही पत्थरबाज अपना रहे हैं। मुठभेड़ों की खबर मिलते ही पत्थरबाज एकत्र होकर अभियान में बाधा पहुंचाने लगते हैं। पहले यही समझा जाता रहा था कि कश्मीरियों द्वारा यह विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है पर जब सच खुल कर सामने आया तो तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सच सामने आने के बाद राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों की सहायता के अतिरिक्त धारा 144 का भी सहारा लिया गया पर परिस्थितियों में कोई अंतर नहीं आया। नतीजा सामने था। आतंकियों को भागने में पत्थरबाज मदद करते रहे और सेना के जवानों को आतंकियों की गोलियों के साथ ही पथराव से भी जूझना पड़ा। अब सेनाधिकारी कहते हैं कि अब वे इस दोहरे मोर्चे से तंग आ गए हैं। अभी तक सेना पत्थरबाजों के खिलाफ कोई सीधी कार्रवाई नहीं कर रही थी लेकिन अब सेना प्रमुख की चेतावनी और धमकी के बाद यह लगने लगा है कि आतंकियों के साथ होने वाली मुठभेड़ें दोहरे मोर्चे पर खूनी साबित इसलिए हो सकती हैं क्योंकि सेना के जवान पत्थरबाजों पर भी सीधी गोलियां दाग सकते हैं।


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