ब्रिटेन में पोर्न में स्कूल यूनिफॉर्म पर रोक की मांग क्यों?

ब्रिटेन की दो छात्राएं पोर्न में स्कूल यूनिफॉर्म के इस्तेमाल पर बैन चाहती हैं. याचिका को 24 हजार लोगों का समर्थन मिला.;

Update: 2026-10-14 06:01 GMT

ब्रिटेन की दो स्कूली छात्राओं ने पोर्नोग्राफिक कंटेंट में स्कूल यूनिफॉर्म के इस्तेमाल पर बैन की मांग उठाई है. उनका कहना है कि इससे छात्राओं का यौन उत्पीड़न होता है. याचिका को 24,000 से अधिक लोगों का समर्थन मिल चुका है.

इंग्लैंड के ऑक्सफोर्डशायर के बिसेस्टर में रहने वाली 15 साल की आयलिन और मे दोनों अपने स्कूल के 'लिटिल फेमिनिस्ट बुक क्लब' की सदस्य हैं. एक ग्रुप चर्चा के दौरान क्लब को पता चला कि दूसरे स्कूलों के छात्र स्कूल यूनिफॉर्म को सेक्स शॉप में बेचने पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

स्कूल की छात्राओं जैसी दिखने वाली पोशाकों का इस्तेमाल पोर्न वीडियो में भी बड़े पैमाने पर होता है.

आयलिन ने डीडब्ल्यू को बताया, "हम सभी इस बात पर एकमत थे. हम इसे एक कदम और आगे ले जाना चाहते थे, हम चाहते थे कि हर तरह के पोर्नोग्राफिक कंटेंट में स्कूल यूनिफॉर्म के इस्तेमाल पर रोक लगे.”

इसके बाद दोनों ने इस मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने के लिए एक ऑनलाइन याचिका शुरू की.

महिलाओं की जिंदगियां बर्बाद कर रहे हैं डीपफेक वीडियो

याचिका के मुताबिक, उनकी कई सहपाठियों को स्कूल यूनिफॉर्म पहनने के दौरान पहले ही अप्रिय अनुभवों का सामना करना पड़ा है. कुछ छात्राओं ने बताया कि 11 साल की उम्र से ही उन्हें परेशान किया जाने लगा था. इन अनुभवों के कारण कई छात्राएं डरी हुई, शर्मिंदा और असुरक्षित महसूस करने लगीं. मे ने कहा, "मैं स्कूल के बाहर अपनी यूनिफॉर्म नहीं पहनती, मुझे इसे बाहर पहनना पसंद नहीं है.”

हर तीन में से एक छात्रा ने किया यौन उत्पीड़न का सामना

अपनी याचिका में छात्राओं ने 2018 में चैरिटी संस्था प्लान इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया है. रिपोर्ट में शामिल, सर्वे के मुताबिक, 14 से 21 साल की उम्र के 1004 प्रतिभागियों में से 35 फीसदी ने स्कूल यूनिफॉर्म पहनने के दौरान अनचाहा यौन व्यवहार का सामना किया था.

स्कर्ट के नीचे की तस्वीर लेने को हांग कांग ने भी बनाया अपराध

आठ फीसदी ने बताया कि किसी अजनबी ने उनकी अनुमति के बिना उनका वीडियो बनाया या तस्वीर खींची थी, या उनकी स्कर्ट के नीचे से तस्वीर लेने की कोशिश भी की थी. इस तरह की हरकत को 'अपस्कर्टिंग' कहा जाता है.

मे ने कहा, "जिस चीज को मासूमियत का प्रतीक होना चाहिए, जो समुदाय की भावना को दर्शाती है, उसकी छवि अब समाज में खराब हो गई है. इस घिनौने मीडिया ने स्कूल यूनिफॉर्म के प्रति हमारी सोच को विकृत कर दिया है.”

कई देशों में स्कूल यूनिफॉर्म अनिवार्य

दुनिया के कई देशों में स्कूल यूनिफॉर्म आम है. इसका मकसद छात्रों के बीच आर्थिक और सामाजिक असमानताओं को कम दिखाना है. इससे बुलिंग रोकने और बच्चों में सामुदायिक भावना मजबूत करने में भी मदद मिलने की उम्मीद होती है.

ब्रिटेन में लगभग सभी स्कूलों और प्री-स्कूलों में यूनिफॉर्म अनिवार्य है. इसका मतलब है कि चार से 16 साल की उम्र के लगभग सभी बच्चे स्कूल यूनिफॉर्म पहनते हैं लेकिन स्कूल के बाहर बच्चों के पास अनचाहे ध्यान और टिप्पणियों से बचने का कोई तरीका नहीं होता.

मे ने कहा, "हम सिर्फ ये रोकना चाहते हैं कि लोग बच्चों और स्कूल यूनिफॉर्म को उस नजर से देखना शुरू कर दें.” उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी मांग को कानून का रूप दिया जा सकेगा. हालांकि, इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है लेकिन दोनों छात्राएं आशावादी हैं.

5 अक्टूबर 2026 तक उनकी याचिका पर 24000 से ज्यादा हस्ताक्षर हो चुके थे. अंग्रेजी अखबार द टाइम्स में इस मुद्दे पर लेख प्रकाशित होने के बाद इसे काफी ध्यान भी मिला. अब आयलिन और मे चाहती हैं कि ब्रिटेन की संसद में इस मुद्दे पर चर्चा हो. दो सांसद पहले ही उनके अभियान का समर्थन कर चुके हैं.

हालांकि, दोनों छात्राओं को पता है कि कुछ लोग इस समस्या का समाधान स्कर्ट की लंबाई बढ़ाने में देखते हैं. आयलिन ने कहा, "मुझे लगता है कि यह गलत है. हमें पीड़ितों को दोष नहीं देना चाहिए. हमें उन लोगों को जिम्मेदार ठहराना चाहिए, जो बच्चों को यौन नजरिए से देखना स्वीकार्य समझते हैं.”

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