जापान में आम चुनाव की वोटिंग शुरू, सत्ता बचाने की चुनौती में एलडीपी गठबंधन
जापान में आम चुनाव के लिए मतदान रविवार सुबह शुरू हो गया। इस चुनाव में संसद के निचले सदन, यानी प्रतिनिधि सभा की 465 सीटों के लिए कुल 1,284 उम्मीदवार मैदान में हैं
465 सीटों पर 1,284 उम्मीदवार मैदान में, देर रात तक चलेगी मतगणना
- प्रधानमंत्री ताकाइची का दांव- बहुमत न मिला तो पद छोड़ेंगी
- सर्वे में गठबंधन को बढ़त, लेकिन अनिर्णीत मतदाता बना सकते हैं खेल
- भारी बर्फबारी से मतदान प्रभावित, सुरक्षा और टर्नआउट पर चिंता
टोक्यो। जापान में आम चुनाव के लिए मतदान रविवार सुबह शुरू हो गया। इस चुनाव में संसद के निचले सदन, यानी प्रतिनिधि सभा की 465 सीटों के लिए कुल 1,284 उम्मीदवार मैदान में हैं।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, इस चुनाव का मुख्य मुद्दा यह है कि क्या सत्तारूढ़ गठबंधन 'लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) और जापान इनोवेशन पार्टी' बहुमत हासिल कर पाएंगे और प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की सरकार आगे चलती रहेगी।
देशभर में मतदान केंद्र स्थानीय समय के अनुसार रात 8 बजे बंद हो जाएंगे और मतगणना देर रात तक चलने की उम्मीद है।
जापान के बड़े मीडिया संस्थानों के हालिया सर्वेक्षणों से संकेत मिला है कि सत्तारूढ़ गठबंधन के बहुमत हासिल करने की संभावना है। वहीं, क्योदो न्यूज के एक सर्वे के अनुसार, जापान की संवैधानिक डेमोक्रेटिक पार्टी और एलडीपी की पूर्व सहयोगी कोमेटो द्वारा बनाई गई नई विपक्षी पार्टी ‘सेंट्रिस्ट रिफॉर्म एलायंस’ को चुनाव से पहले की तुलना में नुकसान होता दिख रहा है।
हालांकि, इन अनुमानों के बावजूद सर्वे बताते हैं कि बड़ी संख्या में मतदाता अब भी फैसला नहीं कर पाए हैं। ऐसे में आखिरी समय में नतीजों में बदलाव की संभावना बनी हुई है। साथ ही, एलडीपी से जुड़े घोटाले भी चुनाव को लेकर अनिश्चितता बढ़ा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ताकाइची ने 23 जनवरी को अचानक निचले सदन को भंग कर जल्दी चुनाव कराने का फैसला किया था। यह पिछले 60 सालों में पहली बार हुआ जब संसद के नियमित सत्र की शुरुआत में ही सदन भंग किया गया। उन्होंने कहा है कि अगर गठबंधन बहुमत नहीं जीतता, तो वह पद छोड़ देंगी।
उनके इस फैसले की आलोचना भी हुई है। आलोचकों का कहना है कि उन्होंने अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष 2026 के शुरुआती बजट को पास कराने की बजाय राजनीतिक हितों को ज्यादा महत्व दिया, जबकि उन्होंने नीति लागू करने को प्राथमिकता देने का वादा किया था।
यह 1990 के बाद पहली बार है जब जापान में फरवरी महीने में निचले सदन का चुनाव हो रहा है। वहीं, जापान सागर के तटवर्ती इलाकों में भारी बर्फबारी जारी रहने से यातायात में बाधा और मतदाताओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है। इससे मतदान प्रतिशत पर भी असर पड़ सकता है।