अमेरिका ने आईसीसी प्रमुख पर लगाए प्रतिबंध लगाए, व्यापक अभियान चलाने का लिया संकल्प
अमेरिका ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) के प्रेसिडेंट और एक सीनियर ट्रायल लॉयर पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इससे ट्रम्प प्रशासन का इस कोर्ट के खिलाफ अभियान और बढ़ गया है। कोर्ट के कामकाज को रोकने के लिए और कदम उठाने की धमकी भी दी गई है।;
वॉशिंगटन । अमेरिका ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) के प्रेसिडेंट और एक सीनियर ट्रायल लॉयर पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इससे ट्रम्प प्रशासन का इस कोर्ट के खिलाफ अभियान और बढ़ गया है। कोर्ट के कामकाज को रोकने के लिए और कदम उठाने की धमकी भी दी गई है।
सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने कहा कि जापान की आईसीसी प्रेसिडेंट टोमोको अकाने और सेनेगल के सीनियर ट्रायल लॉयर अब्दौलाये सेये को एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के तहत प्रतिबंधित किया गया है। इस ऑर्डर में कोर्ट के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की अनुमति दी गई है।
रुबियो ने इन दोनों अधिकारियों पर उन देशों के अधिकारियों के खिलाफ आईसीसी की कार्रवाई में सीधे तौर पर शामिल होने का आरोप लगाया, जो कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को मान्यता नहीं देते हैं।
उन्होंने एक बयान में कहा, "ये लोग आईसीसी की उन कोशिशों में सीधे तौर पर शामिल रहे हैं, जिनमें उन अधिकारियों की जांच, गिरफ्तारी, हिरासत या उन पर मुकदमा चलाने की कार्रवाई की गई, जिनकी सरकारों ने आईसीसी के अधिकार क्षेत्र को मंजूरी नहीं दी है।"
स्टेट डिपार्टमेंट के अनुसार, ये प्रतिबंध एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14203 की धारा 1(ए)(2)(ए) के तहत लगाए गए हैं। इस ऑर्डर का शीर्षक है "इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट पर प्रतिबंध लगाना।"
इस घोषणा से आईसीसी के साथ वॉशिंगटन के टकराव में तेजी आई है। प्रशासन ने इस ट्रिब्यूनल को अमेरिका की संप्रभुता के लिए खतरा बताया है और दूसरे देशों से अपना आर्थिक और राजनीतिक समर्थन वापस लेने की अपील की है।
रुबियो ने कहा, "ट्रंप प्रशासन का रुख साफ रहा है। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) एक भ्रष्ट और बुरी तरह से राजनीतिक रंग में रंगी हुई अंतरराष्ट्रीय अदालत है, जिसने दुर्भावनापूर्ण तरीके से अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया है और अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया है। हम देश की संप्रभुता पर इसके हमले को बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
रुबियो ने कहा कि ये कदम उस कूटनीतिक अभियान का हिस्सा हैं, जिसे प्रशासन ने पिछले महीने शुरू किया था, ताकि आईसीसी द्वारा सत्ता के दुरुपयोग के तौर पर देखे जाने वाले मामलों को चुनौती दी जा सके।
प्रशासन की मुख्य आपत्ति यह है कि अदालत ने उन देशों के लोगों पर अधिकार जमाने की कोशिश की है जिन्होंने इसके अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया है।
रूबियो ने कहा, "आईसीसी ने बार-बार उन देशों के नागरिकों पर अपना अधिकार जमाने की कोशिश की है, जिन्होंने इसके अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया है या रोम स्टैच्यू को मंजूरी नहीं दी है। यह सभी देशों के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करता है।"
रूबियो ने साफ किया कि मंगलवार को की गई कार्रवाई प्रशासन का आखिरी कदम नहीं होगा। अमेरिका पूरी सरकार के स्तर पर एक ऐसी कोशिश कर रहा है, जिसका मकसद कोर्ट की उस क्षमता को कमजोर करना है, जिसके जरिए वह अमेरिकियों और उन देशों के नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है जो इसके संस्थापक समझौते का हिस्सा नहीं हैं।
उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए आईसीसी से पैदा हुए खतरे को खत्म करने का हमारा सरकारी अभियान बहुत व्यापक होगा। हमें उम्मीद है कि और भी देश इस राजनीतिक और गैर-जवाबदेह कोर्ट को फंडिंग और उसमें अपनी भागीदारी बंद करके हमारे अभियान में शामिल होंगे।"
रूबियो ने आगे कहा, "आईसीसी की अमेरिकी नागरिकों और उन देशों के नागरिकों को निशाना बनाने की क्षमता खत्म होनी चाहिए जो इसके सदस्य नहीं हैं।"
रूबियो ने कहा, "ट्रम्प प्रशासन जरूरत पड़ने पर और कदम उठाने के लिए तैयार है ताकि आईसीसी को व्यवस्थित रूप से तब तक खत्म किया जा सके, जब तक कि वह अमेरिकी संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करने में असमर्थ न हो जाए।"
हेग में स्थित आईसीसी की स्थापना रोम स्टैच्यू के तहत की गई थी, जो 2002 में लागू हुआ था। यह नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराध और आक्रामकता के अपराध के आरोपी व्यक्तियों पर मुकदमा चलाता है, जब राष्ट्रीय अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र की सीमाओं के भीतर कार्रवाई करने में असमर्थ या अनिच्छुक होते हैं।