ट्रंप की धमकी: समझौता न हुआ तो ईरान को भेज देंगे पाषाण युग में

ईरान के खिलाफ युद्ध के उद्देश्यों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुरू से ही भ्रमित दिख रहे हैं वह कभी कहते हैं कि वह ईरान के विरुद्ध अपने अभियान को खत्म कर सकते हैं तो कहीं ईरान को धमकाते दिखते हैं

Update: 2026-04-02 03:18 GMT

अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा– ईरान की सेना और एयरफोर्स तबाह

  • ऑपरेशन एपिक फ्यूरी: ट्रंप बोले, ईरान का न्यूक्लियर खतरा खत्म करने की कगार पर
  • “धरती की सबसे हिंसक सरकार”– ट्रंप का ईरान पर तीखा हमला
  • तेल की कीमतों पर ईरान जिम्मेदार, ट्रंप ने क्षेत्रीय देशों से की अपील

वॉशिंगटन। ईरान के खिलाफ युद्ध के उद्देश्यों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुरू से ही भ्रमित दिख रहे हैं वह कभी कहते हैं कि वह ईरान के विरुद्ध अपने अभियान को खत्म कर सकते हैं तो कहीं ईरान को धमकाते दिखते हैं। इस बीच उन्होंने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना कुछ ही हफ्तों में उन्हें पाषाण युग में वापस ले जा सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर से दावा किया है कि ईरान की सेना खत्म हो चुकी है। स्थानीय समयानुसार बुधवार को टीवी पर दिए भाषण में ट्रंप ने कहा कि “अभी सिर्फ एक महीना हुआ है, जब अमेरिकी सेना ने आतंक के दुनिया के नंबर वन स्पॉन्सर ईरान को टारगेट करते हुए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया था।”

उन्होंने दावा किया कि लड़ाई के मैदान में तेजी से बढ़त हासिल की जा रही है।

उन्होंने कहा, “आज रात, ईरान की नेवी खत्म हो गई है। उनकी एयरफोर्स बर्बाद हो गई है। उनके नेता अब मर चुके हैं। ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता बहुत कम कर दी गई हैं और हथियार फैसिलिटी टुकड़ों में उड़ा दी गई हैं।”

उन्होंने इस कैंपेन को ईरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने से रोकने के लिए जरूरी बताया। ट्रंप ने कहा, “मैंने कसम खाई है कि मैं ईरान को कभी न्यूक्लियर हथियार नहीं रखने दूंगा।” ट्रंप ने ईरान की मौजूदा सरकार को “धरती की सबसे हिंसक सरकार” कहा।

ऑपरेशन मिडनाइट हैमर और पहले के अमेरिकी हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “हमने उन न्यूक्लियर साइट्स को पूरी तरह से खत्म कर दिया। ईरान ने कहीं और अपना प्रोग्राम फिर से बनाने की कोशिश की थी।”

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का मकसद ईरान की सैन्य क्षमता और अपनी सीमाओं के बाहर ताकत दिखाने की उसकी काबिलियत को खत्म करना था। उन्होंने कहा, “ये मुख्य रणनीतिक मकसद पूरे होने वाले हैं।”

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बातचीत फेल हो जाती है तो और तनाव बढ़ेगा और कहा, “अगले दो से तीन हफ्तों में, हम उन्हें स्टोन एज में वापस ले जाएंगे। अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान के इलेक्ट्रिक इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट कर सकता है।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि ईरान के शासन में बदलाव तय मकसद नहीं था। ट्रंप ने कहा कि लीडरशिप में बदलाव पहले ही हो चुके हैं। सत्ता परिवर्तन हमारा मकसद नहीं था, लेकिन शासन में बदलाव उनके सभी असली नेताओं की मौत की वजह से हुआ है।”

राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनियाभर में तेल की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि ऐसा कमर्शियल तेल टैंकरों पर हुए आतंकी हमलों की वजह से हुआ। उन्होंने मिडिल ईस्ट के तेल पर निर्भर देशों से शिपिंग रूट सुरक्षित करने और इस इलाके पर निर्भरता कम करने की अपील की।

ट्रंप इजरायल, सऊदी अरब, कतर, यूएई, कुवैत और बहरीन जैसे क्षेत्रीय साथियों की सराहना करते हुए कहा कि वे अभियान में बहुत अच्छे साझेदार रहे हैं। ट्रंप ने अमेरिका की आर्थिक मजबूती पर भी जोर दिया और कहा कि देश दुनिया में तेल और गैस का नंबर एक प्रोड्यूसर है और लड़ाई से जुड़ी रुकावटों को झेल सकता है। उन्होंने 13 अमेरिकी सैनिकों के खोने की बात को स्वीकार किया और कहा कि उनके परिवारों ने उनसे काम पूरा करने की अपील की थी।

ऑपरेशन को ऐतिहासिक रूप से तेज बताते हुए, ट्रंप ने कहा कि इस कैंपेन ने सिर्फ एक महीने में एक बड़े खतरे को खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा, "हम अमेरिका और दुनिया के लिए ईरान के खतरनाक खतरे को खत्म करने की कगार पर हैं।"

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