आज भी इस्राएलियों का पीछा करता है 7 अक्टूबर का हमला

एक तिहाई से ज्यादा इस्राएलियों में, मानसिक स्वास्थ्य के संकट से जुड़े लक्षण दिख रहे हैं.;

Update: 2026-10-07 06:08 GMT

एक तिहाई से ज्यादा इस्राएली, मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे हैं. हमास के हमले के तीन साल बाद भी इस्राएल का हेल्थ सिस्टम 7 अक्टूबर के आतंक के नतीजे झेल रहा है.

चेतावनी: इस लेख में आत्महत्या से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख है जो कुछ पाठकों को परेशान कर सकती हैं.

7 अक्टूबर 2023 के हमलों की तीसरी बरसी करीब आते ही रोनेन शालेव का बदन संकेत देने लगता है कि बेचैनी और पीड़ा लौट रहे हैं. डीडब्ल्यू से बात करते हुए शालेव ने कहा, "आप कांपने लगते हैं."

इस तारीख को याद करते हुए आगे उन्होंने कहा, "यह सिर्फ एक दिन नहीं होता जिसे आप भुला दें. हमें कब्रों पर जाना होता है, कई परिवारों से मिलना होता है. यह बहुत मुश्किल वक्त होता है और आप इसे अपने शरीर में महसूस करते हैं."

शावेल के दोनों बच्चे, 7 अक्टूबर को दक्षिणी इस्राएल के नोवा म्यूजिक फेस्टिवल में मौजूद थे. हमास और अन्य फलस्तीनी लड़ाकों ने बॉर्डर पार कर पहला हमला वहीं किया. उस हमले में लगभग 400 लोग मारे गए. 7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुए उन हमलों में करीब 1,200 लोग मारे गए. लगभग 250 लोगों को बंधक बनाया गया.

उस हमले के बाद गाजा युद्ध शुरू हुआ. युद्ध के दौरान इस्राएल की सैन्य कार्रवाई में हजारों फलस्तीनियों की मौत हुई और बड़ी आबादी विस्थापित हुई.

इस्राएल-हमास युद्ध: गाजा में पसरा सदमा और बर्बादी

शालेव के बेटे रोई को उन हमलों में गोली लगी. अस्पताल में उसकी जान बचाई जा सकी. हालांकि रोई की साथी मापाल अदाम उसकी आंखों के सामने मारी गई. शालेव की बेटी लियोर भी किसी तरह वहां से भागने सफल रही. हमले के कुछ समय बाद शालेव की पत्नी गाव्रिएला लापता हो गईं. बाद में उनका शव एक जली हुई कार में मिला. पास में एक विदाई पत्र भी था. शालेव कहते हैं, "वह उस दिन के दुख को सहन नहीं कर पाई."

इसी दौरान उनके बेटे रोई में सदमे से उत्पन्न तनाव के लक्षण दिखाई देने लगे. इनमें सबसे स्पष्ट था बेहद तेज भावनात्मक उतार चढ़ाव. शालेव कहते हैं, "वह सिर्फ मुझे खुश करने के लिए इलाज कराने गया. उसे खुद भी इस पर भरोसा नहीं था. उसे लगता था कि वह ठीक है, मजबूत है."

गाव्रिएला की मौत के दो साल बाद रोई भी खुद को संभाल नहीं सका. इंस्टाग्राम पर लिखे अपने विदाई संदेश में कहा, "मैं जिंदा हूं लेकिन भीतर से मर चुका हूं. मुझे माफ कर देना."

आघात से जूझता एक देश

अक्टूबर 2023 से इस्राएल, एक अभूतपूर्व मानसिक स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है. फरवरी 2025 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 39 फीसदी लोगों ने बताया कि वे पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस, अवसाद, चिंता या इन सभी समस्याओं से मध्यम या गंभीर रूस से प्रभावित हैं. यह रिपोर्ट इस्राएल के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने जारी की है.

ऐसी मानसिक बीमारियों से जूझने वाले इस्राएलियों की संख्या करीब 30 लाख है. इनमें से लगभग 6 लाख की स्थिति गंभीर हो सकती है. रिपोर्ट में यह भी कहती है कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं लेने वालों की संख्या में केवल एक फीसदी की बढ़ोतरी हुई. यानी लगभग 60,000 अतिरिक्त लोग ही इलाज तक पहुंच सके.

प्रभावित लोगों में हमले से बचे लोग और युद्ध के कारण दक्षिणी तथा उत्तरी इस्राएल से विस्थापित नागरिक शामिल हैं. इस्राएली शोध संस्था अदवा सेंटर की शोधकर्ता नोगा दागान-बुजाग्लो कहती हैं कि युद्ध के बाद मानसिक स्वास्थ्य बजट बढ़ाया जरूर गया, लेकिन यह बहुत कम और बहुत देर से उठाया गया कदम था.

दागान-बुजाग्लो के मुताबिक, सबसे बड़ी चुनौती लोगों को सरकारी, मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था में काम करने के लिए तैयार करना है. निजी क्षेत्र की तुलना में वहां तनख्वाह कम और काम का बोझ बहुत ज्यादा है.

दवाओं पर बढ़ती निर्भरता

यह संकट मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को भी प्रभावित कर रहा है. इस्राएल की हाइफा यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन के मुताबिक, 7 अक्टूबर के हमले से प्रभावित लोगों का इलाज करने वाले 84 प्रतिशत थेरेपिस्ट खुद भी आघात के लक्षण महसूस कर रहे थे. इनमें से करीब 45 फीसदी ने मानसिक रूप से बेहद थका हुआ महसूस करने की बात कही.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए धन और पद बढ़ाने की घोषणा की थी, लेकिन कर्मचारियों की कमी अब भी बरकरार है, खासकर दूरदराज के इलाकों में. सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो निजी थेरेपिस्ट का खर्च नहीं उठा सकते.

सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली के तहत मनोवैज्ञानिक सहायता पाने के लिए लोगों को छह महीने से ज्यादा इंतजार करना पड़ता है. कुछ मामलों में यह इंतजार एक साल से भी अधिक रहा. सरकारी व्यवस्था की कमी को पूरा करने के लिए गैर सरकारी संगठन और स्वयंसेवक आगे आए, लेकिन वे भी भारी दबाव में काम कर रहे हैं.

इसका नतीजा यह हुआ है कि नींद की गोलियों, तनाव कम करने वाली दवाओं और एंटीडिप्रेसेंट दवाओं के इस्तेमाल में भारी इजाफा हुआ है. इस्राएली स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन दवाओं के पर्चों में 13 से 17 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है.

इस्राएली सैनिक भी जोखिम में

मानसिक स्वास्थ्य संकट का बड़ा असर सैनिकों पर भी पड़ा है. इस्राएली संसद और सेना के आंकड़ों के अनुसार रिजर्व सैनिकों में आत्महत्या के मामलों में तेज बढ़े हैं. युद्ध से पहले छह वर्षों में अधिकतम एक मामला प्रति वर्ष सामने आता था. लेकिन 2024 में ऐसे 11 मामले दर्ज किए गए. 2025 में नौ और मामलों की जांच आत्महत्या के एंगल से की गई.

इन आंकड़ों में वे पूर्व सैनिक शामिल नहीं हैं जिन्होंने सेवा समाप्त होने के बाद मानसिक आघात की वजह से जान गंवाई. दागान-बुजाग्लो का कहना है कि सेना में काम करने वाले विशेषज्ञों को बेहतर वेतन और सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन वहां भी कर्मियों की कमी साफ दिखाई देती है. उनके मुताबिक समस्या का समाधान तभी मुमकिन है जब सरकार यह स्वीकार करे कि मानसिक आघात एक साल में खत्म नहीं होता और इसके लिए लंबे समय तक निवेश की जरूरत होती है.

मानसिक आघात व सदमे पर चुप्पी तोड़ने की कोशिश

रोनेन शालेव अब नियमित रूप से लेक्चर देते हुए मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर बात करते हैं. अक्सर उनके श्रोता सैनिक होते हैं. खुद पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर से जूझ चुके शालेव कहते हैं कि उन्होंने जीने का फैसला किया है. उनका मानना है कि आत्मघाती विचारों को लेकर इस्राएली समाज में जो चुप्पी और संकोच है उसे तोड़ना जरूरी है.

वह कहते हैं, "जो लोग खुद को बहुत मजबूत बताते हैं, कई बार वही सबसे ज्यादा जोखिम में होते हैं क्योंकि उनके मदद लेने की संभावना सबसे कम होती है." शालेव के लिए अपने परिवार की कहानी सार्वजनिक रूप से साझा करना अपने इलाज का हिस्सा बन चुका है. उनका संदेश साफ है. "जिंदगी में चाहे कितना भी दर्द क्यों न हो, फिर भी हमेशा जीने को चुनना सार्थक है."

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