पाकिस्तान में बढ़ता टैक्स कलेक्शन संकट, लक्ष्य से 610 अरब रुपए पीछे एफबीआर
पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। देश अपने टैक्स कलेक्शन के लक्ष्य पूरे करने में संघर्ष कर रहा है और इस वित्त वर्ष में फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (एफबीआर) काफी पीछे रह गया है। एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है
नई दिल्ली। पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। देश अपने टैक्स कलेक्शन के लक्ष्य पूरे करने में संघर्ष कर रहा है और इस वित्त वर्ष में फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (एफबीआर) काफी पीछे रह गया है। एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह कमी पाकिस्तान की धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था को दिखाती है, जिसे मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण व्यापार में आई रुकावटों ने और खराब कर दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान का टैक्स कलेक्शन गैप तेजी से बढ़ गया है, फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू वित्तीय वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों के लिए अपने टारगेट से 610 बिलियन रुपए पीछे रह गया है।
मार्च में हालात और बिगड़ गए, क्योंकि वैश्विक व्यापार में रुकावट और धीमी आर्थिक गतिविधियों की वजह से सरकारी आय कम हो गई।
अधिकारियों को डर है कि यह अंतर आगे और बढ़ सकता है, जिससे पूरे साल का टैक्स लक्ष्य हासिल करना और मुश्किल हो जाएगा।
हालांकि, हाल ही में सरकार ने एक फैसला लिया कि अंतरराष्ट्रीय तेल की बढ़ी कीमतों का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डाला जाए। इससे फ्यूल सब्सिडी बढ़ाने से बचा गया और सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव नहीं पड़ा।
फिर भी टैक्स कलेक्शन पर दबाव बना हुआ है। खासकर ऊर्जा और गैस सेक्टर में आयात कम होने से इंपोर्ट पर लगने वाला सेल्स टैक्स घट गया है, जो सरकार की आमदनी का बड़ा हिस्सा होता है।
इसी बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की तरफ से भी दबाव बढ़ रहा है। आईएमएफ ने अगले वित्त वर्ष के लिए 15.6 ट्रिलियन रुपए का बड़ा टैक्स लक्ष्य तय किया है।
इसके अलावा, करीब 400 अरब रुपए के अतिरिक्त राजस्व उपाय करने की भी उम्मीद जताई गई है। मौजूदा साल का संशोधित लक्ष्य 13.98 ट्रिलियन रुपए है, जो पहले ही काफी पीछे छूटता दिख रहा है। ऐसे में जानकारों का मानना है कि अगले साल का लक्ष्य हासिल करना काफी मुश्किल हो सकता है।
मामला और पेचीदा इसलिए हो जाता है क्योंकि आईएमएफ ने अपनी अगली फंडिंग को कुछ शर्तों से जोड़ दिया है। इसमें एफबीआर के पक्ष में तय हो चुके टैक्स मामलों से 322 अरब रुपए की वसूली भी शामिल है।
साथ ही आईएमएफ की ओर से 1.2 बिलियन डॉलर की अगली किस्त जारी करने का फैसला भी इन्हीं शर्तों पर निर्भर करेगा।