भारतीय मजदूरों के लिए दिग्गज अमेरिकी कंपनी से भिड़ा इटली
इटली ने दूतावास और कॉन्सुलेट बनाने वाली दिग्गज अमेरिकी कंपनी को इस सैटलमेंट के लिए बाध्य किया है.;
इटली में काम करने वाले सैकड़ों विदेशी मजदूरों को 3.1 करोड़ यूरो कैश मिलेंगे. इटली ने दूतावास और कॉन्सुलेट बनाने वाली दिग्गज अमेरिकी कंपनी को इस सैटलमेंट के लिए बाध्य किया है.
दिग्गज अमेरिकी निर्माण कंपनी कैडेल कंस्ट्रक्शन, श्रमिकों के शोषण के मामले में हर मजदूर को मुआवजा देने पर सहमत हो गई है. समझौते के तहत कंपनी, शोषण का शिकार होने वाले हर मजदूर को औसतन 45,000 यूरो देगी. समझौते के तहत अब तक यह राशि पाने वालों में ज्यादातर भारतीय कामगार हैं. बुधवार, 7 अक्टूबर को हुई समझौते की डील के तहत अल्बामा मुख्यालय वाली अमेरिकी कंपनी कुल 3.1 करोड़ यूरो चुकाएगी.
इटली के अभियोजन पक्ष का दावा है कि यह यूरोप में श्रम अधिकारों के दुरुपयोग के मामले में सबसे बड़ा समझौता है. समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, हर कामगार ने एक दस्तावेज पर दस्तखत किए हैं. दस्तावेज के मुताबिक, श्रमिक कैडेल को बदनाम नहीं करेंगे और निजी भुगतान की जानकारी सार्वजनिक नहीं करेंगे. वहीं कैडेल कंस्ट्रक्शन ने कहा है कि यह समझौता, जिम्मेदारी की स्वीकारोक्ति नहीं है. निजी भुगतान, दस्तावेजों पर दस्तखत के बाद 30 दिन के भीतर किया जाएगा.
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भुगतान की प्रक्रिया शुरू होने के बाद, कुछ मजदूरों ने पहली बार अपने हाथ में नकद में इतनी बड़ी रकम देखी है. अदालत द्वारा नियुक्त किए गए प्रशासक फ्रांसेस्को ब्रिजाटी के मुताबिक, अधिकतम निजी भुगतान 90,000 यूरो तक का है. ब्रिजाटी ने बताया कि इस भुगतान में अनपेड ओवरटाइम, वेतन से गैरकानूनी रूप से काटा गया हाउसिंग का पैसा और भारी निजी हर्जाना शामिल है.
43 साल के दिलीप राम पत्थर तराशने वाले कारीगर हैं. बिहार में परिवार के पांच लोग उनकी कमाई पर निर्भर हैं. इटली के मिलान शहर में बन रहे बड़े और भव्य अमेरिकी कॉन्सुलेट परिसर के निर्माण में दिलीप राम ने दो साल से भी ज्यादा समय तक काम किया. कैडेल कंस्ट्रक्शन के साथ समझौते पर दस्तखत के बाद राम ने कहा, "अब हालात पहले से बेहतर हैं."
क्यों विवादों में फंसी कैडेल कंस्ट्रक्शन
कैडेल कंस्ट्रक्शन, दुनिया भर में अमेरिकी दूतावास, कॉन्सुलेट और सेना के लिए हाई सिक्योरिटी परिसर बनाती हैं. कंपनी की वेबसाइट कहती है कि उसके पास कई देशों के नागरिकों से बनी वर्कफोर्स है और वह सभी महाद्वीपों में काम करती है.
अभियोजकों के मुताबिक, मिलान कॉन्सुलेट प्रोजेक्ट में कामगारों को 2 डॉलर प्रतिघंटा से भी कम की मजदूरी दी गई. गैरकानूनी रूप से हाउसिंग के नाम पर उनका पैसा काटा गया. मजदूरों से हफ्ते में छह दिन काम कराया गया और 10 घंटे तक काम को ओवरटाइम नहीं माना गया. अभियोजकों का आरोप है कि कुछ मामलों मजदूरों को डराया-धमकाया भी गया. काम के दौरान चोटिल होने पर समुचित मेडिकल सुविधा भी मुहैया नहीं कराई गई.
कैडेल कंस्ट्रक्शन के लिए मिलान में काम करने वाले ज्यादातर मजदूर भारत के थे. भारतीय श्रमिकों के साथ नाइजीरिया, केन्या और बांग्लादेश के कामगार भी वहां काम कर रहे थे.
ऐसी रिपोर्टें हैं कि भारत से आए कामगारों ने ये नौकरी पाने के लिए नियुक्तकर्ताओं को 5,000 यूरो भी दिए. यह पैसा भारत में रहते हुए दिया गया. इतालवी अधिकारियों का कहना है कि सैटलमेंट की रकम में भारत में चुकाया गया यह पैसा शामिल नहीं है.
इटली की एक लेबर यूनियन के आयोजक ट्रिफोने रादोग्ना कहते हैं, "हमने इतने बड़े स्तर पर कामगारों के शोषण का सिस्टम पहले कभी नहीं देखा."
मजदूरों की हालत का जिक्र करते हुए रादोग्ना ने कहा, "यहां कर्मचारियों की गरिमा खो गई: उन्होंने खुद को बिना छत, बिना भोजन के पाया, और घर छोड़ने से पहले चुकाए गए 5,000 यूरो ने उन्हें पहले ही नुकसान में धकेल दिया था."
कैडेल के खिलाफ जारी रहेगी जांच
समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, दो दिन के भीतर 115 कामगारों ने समझौते पर दस्तखत किए हैं. यह प्रक्रिया अगले हफ्ते भी जारी रहेगी.
इस बीच अभियोजकों का कहना है कि कैडेल के खिलाफ जांच जारी है. कंपनी के दो मैनेजरों के खिलाफ वसूली और गैरकानूनी आप्रवासन का मुकदमा चल रहा है. दोनों आरोपियों को उनके घर में नजरबंद रखा गया है.
कैडेल के सैटलमेंट से 1.12 करोड़ यूरो का भुगतान इटली के सामाजिक सुरक्षा फंड और कार्यस्थल दुर्घटना बीमा को होना है.
इस मामले के सामने आने के बाद जून 2026 में कंपनी ने कहा कि वह इतालवी प्रशासन के साथ जांच में सहयोग कर रही है. साथ ही अपने उप ठेकेदारों की समीक्षा भी कर रही है. बुधवार को सैटलमेंट के बाद कंपनी ने कहा, "कैडेल अच्छे भरोसे के तहत इस मामले में समुचित प्रशासनिक इकाइयों से सहयोग कर रही है और हम एक अहम प्रोजेक्ट में काम करने वाले लोगों की देखभाल और कल्याण पर ध्यान देना जारी रखे हुए हैं."
पिछले हफ्ते इस मामले पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी. विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी विभाग इस मामले में इतालवी प्रशासन के संपर्क में है. विदेश मंत्रालय ने कहा, "गैरकानूनी गतिविधियों के प्रति अमेरिकी सरकार में शून्य सहिष्णुता है."
सैटलमेंट राशि के हकदार करीब 480 कामगारों में से करीब 300 अब भी मिलान कॉन्सुलेट परिसर में काम कर रहे हैं. 100 कामगार इटली में कहीं और हैं और बाकी अपने वतन लौट चुके हैं.
विदेशी कामगारों की बैसाखी बना इटली
कामगारों की तरफ से अभियोजन विभाग के लिए पैरवी करने वाले वकील एडेलियो रिवा कहते हैं, "हमने भारतीय कॉन्सुलेट से मदद मांगी है. हम जुबानी बातों पर बहुत ज्यादा निर्भर हो रहे हैं, क्योंकि कहावत है, 'फॉलो द मनी.'"
दस्तावेजों पर दस्तखत करते समय इटली के तीन श्रम संगठन भी कामगारों की मदद कर रहे हैं. कॉन्सुलेट के निर्माण स्थल का दौरा करने के लिए पहले इन्हीं श्रम संगठनों को इजाजत नहीं दी गई थी. श्रम संगठन के आयोजक रादोग्ना के मुताबिक, इनकार की वजह कूटनीतिक स्टेटस बताई गई.