नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए गादी आइजनकोट की 4 शर्तें, स्पीकर को हटाने पर विपक्षी दलों में सहमति

आइजनकोट की चार शर्तों में हरेदी समुदाय के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य करने का मुद्दा अहम है। हरेदी समुदाय के धार्मिक और सामाजिक जीवन में सैन्य सेवा को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है। इस मुद्दे पर इजरायल की राजनीति में भी मतभेद हैं। आइजनकोट चाहते हैं कि नई सरकार इस मामले में स्पष्ट नीति अपनाए और सैन्य सेवा के दायरे में सभी समुदायों को लाया जाए।;

Update: 2026-11-01 10:34 GMT

तेल अवीव: Israel Government Formation: इजरायल में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विपक्षी नेता गादी आइजनकोट ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए दूसरे दलों के सामने चार शर्तें रखी हैं। इनमें हरेदी समुदाय के लोगों के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य करना, इजरायल को यहूदी और लोकतांत्रिक देश बनाए रखना तथा गाजा में हमास का शासन समाप्त करना शामिल है। आइजनकोट ने स्पष्ट किया है कि इन शर्तों को स्वीकार करने वाले राजनीतिक दलों के लिए उनके गठबंधन में शामिल होने का रास्ता खुला है। इजरायली मीडिया वायनेट के मुताबिक, आइजनकोट की इन शर्तों का मकसद नई सरकार के लिए साझा राजनीतिक एजेंडा तैयार करना है। 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। 120 सदस्यों वाली संसद नीसेट में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। आइजनकोट की पार्टी याशार 21 सीटें जीतकर विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वह नेतन्याहू विरोधी दलों को एकजुट करने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं।

हरेदी समुदाय की सैन्य सेवा पर सबसे ज्यादा जोर

आइजनकोट की चार शर्तों में हरेदी समुदाय के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य करने का मुद्दा अहम है। हरेदी समुदाय के धार्मिक और सामाजिक जीवन में सैन्य सेवा को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है। इस मुद्दे पर इजरायल की राजनीति में भी मतभेद हैं। आइजनकोट चाहते हैं कि नई सरकार इस मामले में स्पष्ट नीति अपनाए और सैन्य सेवा के दायरे में सभी समुदायों को लाया जाए। इसके अलावा उनकी शर्तों में इजरायल की यहूदी और लोकतांत्रिक पहचान को बनाए रखना तथा गाजा में हमास के शासन का अंत करना शामिल है। इन मुद्दों पर सहमति बनाने के बाद ही वह दूसरे दलों के साथ सरकार गठन की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।

अरब पार्टियों के साथ गठबंधन की कोशिश

नेतन्याहू विरोधी मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों के बीच भी सरकार बनाने को लेकर बातचीत चल रही है। दोनों खेमों के पास मिलाकर 67 सांसदों का समर्थन बताया जा रहा है, जो बहुमत के आंकड़े से अधिक है। दूसरी ओर, लिकुड पार्टी के नेतृत्व वाले नेतन्याहू समर्थक गठबंधन के पास 53 सांसद हैं। हालांकि, संख्या बल होने के बावजूद विपक्ष के सामने सभी दलों को एक साझा कार्यक्रम पर सहमत करने की चुनौती है। खासकर अरब पार्टियों के लिए आइजनकोट की शर्तों और गठबंधन की नीतियों पर सहमति बनाना महत्वपूर्ण होगा। इसी कारण सरकार गठन की बातचीत में अभी कई राजनीतिक और वैचारिक मुद्दे निर्णायक बने हुए हैं।

आमिर ओहाना को स्पीकर पद से हटाने की तैयारी

विपक्षी खेमे में नेतन्याहू को राजनीतिक झटका देने की एक और रणनीति पर सहमति बनती दिख रही है। लिकुड पार्टी के नेता और नेतन्याहू के करीबी आमिर ओहाना को नीसेट के स्पीकर पद से हटाने की तैयारी है। विपक्षी दलों का मानना है कि नई संसद के गठन के साथ बहुमत के आधार पर स्पीकर को बदलना नेतन्याहू के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इससे विपक्ष संसद में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के साथ सत्ता पक्ष पर दबाव भी बना सकेगा। नई नीसेट के पहले सत्र में इस मुद्दे पर कार्रवाई की संभावना है।

सीधे प्रधानमंत्री चुनने की व्यवस्था पर भी चर्चा

इजरायल में बार-बार सरकार गठन में आने वाली बाधाओं के बीच प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे जनता से कराने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। इस विचार के तहत मतदाता सीधे प्रधानमंत्री चुनेंगे और निर्वाचित नेता अपनी पसंद का मंत्रिमंडल बना सकेगा। उसे सरकार चलाने के लिए नीसेट में 61 सांसदों का समर्थन जुटाने की जरूरत नहीं होगी। यह व्यवस्था कुछ हद तक अमेरिका की राष्ट्रपति प्रणाली जैसी होगी। दिलचस्प बात यह है कि वर्ष 2021 में बहुमत का संकट पैदा होने पर नेतन्याहू ने भी ऐसा प्रस्ताव दिया था। अब विपक्षी दल इसी विकल्प पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इसे लागू करने के लिए मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव करना होगा। अरब पार्टियां इस प्रस्ताव को लेकर अभी असमंजस में हैं।

सरकार बनाने के लिए मिलते हैं अधिकतम 42 दिन

इजरायल में चुनाव के बाद राष्ट्रपति इसाक हर्जोग सभी दलों के नेताओं से बातचीत करते हैं। इसके बाद वह किसी सांसद को सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपते हैं। उस नेता को शुरुआत में 28 दिन मिलते हैं। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति 14 दिन का अतिरिक्त समय दे सकते हैं। इस तरह सरकार गठन के लिए कुल 42 दिन उपलब्ध होते हैं। इस दौरान संबंधित नेता को दूसरी पार्टियों से समर्थन जुटाना और नीतियों तथा मंत्रिपदों पर समझौता करना होता है। चुनाव के बाद आइजनकोट लगातार नेतन्याहू विरोधी दलों के नेताओं से मिल रहे हैं ताकि राष्ट्रपति के सामने सरकार बनाने का मजबूत दावा पेश किया जा सके।

नेतन्याहू विरोध में सड़कों पर उतरे लोग

'टाइम्स ऑफ इजरायल' के मुताबिक, तेल अवीव, बीरशेबा, हाइफा और तईबा में नेतन्याहू सरकार के विरोध में प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों से एकजुट होकर सरकार बनाने की अपील की। उनका कहना था कि चुनाव में नेतन्याहू विरोधी मतों को बहुमत मिला है, इसलिए विपक्षी दलों को मिलकर नई सरकार बनानी चाहिए। अब इजरायल की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आइजनकोट अपनी चार शर्तों पर दूसरे दलों को सहमत कर पाएंगे और नेतन्याहू के खिलाफ बहुमत जुटाकर नई सरकार बना सकेंगे।

Tags:    

Similar News