जर्मन चांसलर मैर्त्स पहुंचे कीव, यूक्रेन के लिए बड़ी सैन्य मदद का ऐलान

जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स रविवार को यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे. यूक्रेन के लिए बड़ी मदद का ऐलान हो सकता है.;

Update: 2026-10-04 13:08 GMT

जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स रविवार को यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे. इस दौरान यूक्रेन की मदद के लिए जर्मनी की तरफ से कई नए ऐलान किए जाने की संभावना है.

जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स रविवार सुबह ट्रेन से यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे. उनके साथ जर्मनी की वित्त मंत्री काथरीना राइषे और कई प्रमुख जर्मन कारोबारी भी मौजूद थे.

कीव पहुंचते ही मैर्त्स ने कहा, "अगर रूस को नहीं रोका गया, तो आज नहीं तो कल वह अपनी युद्ध मशीन का रुख हमारी तरफ भी कर लेगा."

जर्मन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभावना है कि चांसलर रूसी हमले के खिलाफ यूक्रेन की लड़ाई में मदद के लिए कई बड़े कदमों का ऐलान करेंगे. इसमें जर्मनी की तरफ से एक अरब यूरो की अतिरिक्त सैन्य मदद और ऊर्जा क्षेत्र की मरम्मत के लिए 35 करोड़ यूरो की सहायता शामिल है.

इसके अलावा, मैर्त्स यूक्रेन और जर्मनी दोनों जगहों पर इंटरसेप्टर ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों के साझा उत्पादन की योजनाओं का भी खुलासा कर सकते हैं.

ड्रोन उत्पादन बढ़ाने पर जोर

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स और डीपीए के हवाले से जर्मन सरकार के सूत्रों ने बताया कि हथियारों के उत्पादन में खास तौर पर हजारों ऐसे ड्रोन बनाने और उनकी डिलीवरी पर फोकस किया जाएगा, जो रूसी सेना के जेट-पावर्ड ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट कर सकें. रूस आजकल यूक्रेन के नागरिक ठिकानों पर इन्हीं ड्रोन्स से लगातार हमले कर रहा है.

इसके अलावा 1,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों का उत्पादन भी तेज किए जाने की संभावना है. इससे यूक्रेन की फ्रंटलाइन से काफी दूर और सीधे रूस के अंदर मौजूद सैन्य और लॉजिस्टिक ठिकानों पर हमला करने की क्षमता काफी बढ़ जाएगी.

मैर्त्स इस बात पर भी जोर दे सकते हैं कि इस बढ़े हुए सहयोग से खुद जर्मनी को भी फायदा होगा. यह फायदा न सिर्फ रूस की 'हाइब्रिड' गतिविधियों के खिलाफ जर्मनी की अपनी रक्षा के लिहाज से होगा, बल्कि रोजगार और तकनीक के मामले में भी होगा.

इस दौरे पर जर्मन चांसलर की यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ यूक्रेन में चल रहे राजनीतिक सुधारों और भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी लड़ाई पर भी बात हो सकती है.

रूस ने दी राजनयिकों को चेतावनी

मैर्त्स का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब कुछ ही घंटे पहले रूसी विदेश मंत्रालय ने विदेशी राजनयिकों और अन्य मेहमानों को यूक्रेन की राजधानी, खास तौर पर सैन्य और सरकारी इमारतों से दूर रहने की चेतावनी दी थी.

रूस की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया, "इस चेतावनी को नजरअंदाज करने वालों पर किसी भी नकारात्मक परिणाम की पूरी जिम्मेदारी होगी." बयान में यह भी दावा किया गया कि रूसी हमले "हमारे देश के नागरिक बुनियादी ढांचे के खिलाफ यूक्रेनी सशस्त्र बलों की आतंकवादी कार्रवाइयों" का जवाब हैं.

हाल के दिनों में, रूस ने नीप्रो नदी पर बने कई पुलों के साथ साथ यूक्रेन के कई ऊर्जा ढांचे पर भी हमले किए हैं. शुक्रवार को शहर के मेयर विटाली क्लिश्को ने कहा था कि कीव "बेहद मुश्किल और नाजुक हालात" से गुजर रहा है.

लेकिन जर्मन प्रतिनिधिमंडल इन धमकियों से पीछे नहीं हटा. मैर्त्स ने पहुंचने पर कहा कि सर्दियां करीब आ रही हैं और रूसी हमले तेज हो रहे हैं, ऐसे में आने वाले हफ्तों में यूक्रेन को हमारे पूरे समर्थन की जरूरत होगी.

उन्होंने कहा, "युद्ध की पांचवीं सर्दी शुरू होने वाली है. रूस शहरों, अपार्टमेंटों और बिजली घरों पर बमबारी कर रहा है. मैं आज राष्ट्रपति जेलेंस्की से कहूंगा, 'आप हमारी मदद पर भरोसा कर सकते हैं.'"

'जर्मनी डगमगाया, तो यूक्रेन डगमगाएगा'

फरवरी 2022 में रूस के हमले के बाद से किसी जर्मन चांसलर का यूक्रेन का यह चौथा दौरा है. उनके पूर्ववर्ती ओलाफ शॉल्त्स ने अपने तीन साल के कार्यकाल में दो बार कीव का दौरा किया था. वहीं, मैर्त्स खुद पहली बार पद संभालने के सिर्फ चार दिन बाद मई 2025 में कीव गए थे. तब उनके साथ फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टुस्क और ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर भी थे.

रविवार का यह दौरा मैर्त्स के उस बयान के कुछ ही दिनों बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने देश के कुछ तबकों में हो रहे विरोध और आलोचनाओं के बावजूद यूक्रेन को जर्मनी के समर्थन का भरोसा दिया था.

गुरुवार को नाटो सैन्य गठबंधन और उसके महासचिव मार्क रूटे को अंतरराष्ट्रीय वेस्टफालियन शांति पुरस्कार से सम्मानित करते हुए उन्होंने कहा था, "अगर हम जर्मनी में डगमगाते हैं, तो यूरोप डगमगाता है. और अगर यूरोप डगमगाता है, तो यूक्रेन डगमगाता है."

जर्मनी सैन्य और वित्तीय दोनों मोर्चों पर यूक्रेन का सबसे अहम समर्थक बना हुआ है. लेकिन सितंबर में हुए राज्यों के चुनावों में, उन पार्टियों को काफी फायदा हुआ है जो यूक्रेन पर होने वाले खर्च की आलोचना करती हैं. इनमें सैक्सनी-अनहाल्ट और मैक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरानिया में धुर दक्षिणपंथी 'ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (एएफडी) और बर्लिन में वामपंथी 'लेफ्ट पार्टी' शामिल हैं.

गुरुवार को अपने भाषण में मैर्त्स ने विशेष रूप से "एएफडी और उनके रूसी समर्थकों" पर निशाना साधा था और यूक्रेन से वादा किया था कि जर्मनी इस मुद्दे पर नहीं बंटेगा.

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