ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय ने दास व्यापार को बताया ‘घोर अन्याय’
राष्ट्रमंडल शिखर सम्मेलन में ब्रिटेन के किंग चार्ल्स ने कहा कि दास व्यापार का काला इतिहास उन्हें बहुत दुखी करता है.;
राष्ट्रमंडल शिखर सम्मेलन में ब्रिटेन के किंग चार्ल्स ने कहा है कि अटलांटिक पार दास व्यापार का काला इतिहास उन्हें बहुत दुखी करता है. हालांकि, उन्होंने इस ऐतिहासिक अन्याय के लिए माफी और मुआवजे की मांगों पर कुछ नहीं कहा.
ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय ने 3 नवंबर को एंटीगुआ और बारबुडा में राष्ट्रमंडल देशों के शासनाध्यक्षों के सम्मेलन की शुरुआत की. इस सप्ताह आयोजित हो रहे इस शिखर सम्मेलन में राष्ट्रमंडल के 56 सदस्य देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं. अपने संबोधन में चार्ल्स ने अटलांटिक पार दास व्यापार के दुखद इतिहास और उसकी विरासत का जिक्र किया.
चार्ल्स ने वहां मौजूद लोगों से कहा कि उन्होंने इस मुद्दे के बारे में सुनकर, सीखकर और समझने की कोशिश करके अपनी जानकारी बढ़ाई है. उन्होंने कहा, "अटलांटिक पार हुआ गुलामों का व्यापार आज भी इन द्वीपों और राष्ट्रमंडल के दूसरे देशों के इतिहास पर एक काली छाया की तरह मौजूद है. जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, इतिहास का यह कलंकित दौर मेरे दिल में भय और मन में गहरा दुख भर देता है.”
हालांकि, चार्ल्स ने दास व्यापार में ब्रिटेन की भूमिका के लिए न तो माफी मांगी और न ही मुआवजे के मुद्दे पर कोई बात की. इसके बजाय, उन्होंने अतीत में हुए ‘घोर अन्याय' से आगे बढ़ने और भविष्य पर ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि ‘बुराई की जीत न हो.'
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नम भी इस सम्मेलन में मौजूद थे. वह पहले ही संकेत दे चुके हैं कि ब्रिटेन की ओर से माफी मांगने पर विचार किया जा सकता है. शिखर सम्मेलन शुरू होने से पहले माफी और संभावित आर्थिक मुआवजे का मुद्दा चर्चा में छाया रहा.
किंग चार्ल्स और प्रधानमंत्री बर्नम दोनों ने कहा है कि वे इस शिखर सम्मेलन में भविष्य की साझेदारियों पर बात करेंगे. उनका मकसद अतीत में उलझे रहने के बजाय, उन लोगों की मदद के लिए तरीके खोजना है जो "मुश्किलों और अभावों से जूझ रहे हैं.” इसमें स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और जलवायु संरक्षण जैसी जरूरतें शामिल हैं. सत्र की शुरुआत करते हुए किंग चार्ल्स ने कहा, "हम अपने से पहले आए लोगों के कामों को तो नहीं बदल सकते, लेकिन हम अतीत से सबक जरूर ले सकते हैं.”
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बर्नम ने कहा है कि वह राष्ट्रमंडल के छोटे देशों को कर्ज में राहत देने के उपायों पर चर्चा करना चाहते हैं. इसके साथ ही, उन्होंने अगले तीन वर्षों में कैरेबियाई क्षेत्र के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में 4.82 करोड़ यूरो (5.4 करोड़ डॉलर) के निवेश की घोषणा की है.
ट्रांसअटलांटिक दास व्यापार में ब्रिटिश साम्राज्य की क्या भूमिका थी?
ब्रिटेन 17वीं सदी में संगठित दास व्यापार में शामिल हुआ था. जल्द ही उसने इस कारोबार में दूसरी यूरोपीय शक्तियों को पीछे छोड़ दिया. हालांकि, 1807 के दास व्यापार अधिनियम के तहत ब्रिटिश नागरिकों के लिए इस व्यापार में शामिल होना गैरकानूनी घोषित कर दिया गया. इसके बाद, 1833 के दास प्रथा उन्मूलन अधिनियम के जरिए पूरे ब्रिटिश साम्राज्य में इसे खत्म कर दिया गया.
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उस दौर में अटलांटिक पार गुलामों को ले जाने वाले कुल जहाजों में से लगभग एक-तिहाई जहाज ब्रिटेन के थे. इन जहाजों के जरिए 32 लाख से अधिक अफ्रीकी लोगों को जबरन उनके घरों से दूर ले जाया गया. इनमें से ज्यादातर को कैरेबियाई क्षेत्र और उत्तरी अमेरिका के ब्रिटिश उपनिवेशों में पहुंचाया गया.
राष्ट्रमंडल देशों में मुख्य रूप से वे देश शामिल हैं जो कभी ब्रिटिश उपनिवेश हुआ करते थे. इन देशों की कुल जीडीपी लगभग 14.5 ट्रिलियन डॉलर है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था का लगभग 15 फीसदी हिस्सा है.