पश्चिम बंगाल: टीएमसी के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता की मांग, सुप्रीम कोर्ट पहुंचे शोभनदेब चट्टोपाध्याय

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 बागी विधायकों की अयोग्यता की मांग की।;

Update: 2026-10-23 21:38 GMT

कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 बागी विधायकों की अयोग्यता की मांग की।

जिन 10 विधायकों की अयोग्यता की मांग की गई है, उनमें विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी और कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के पूर्व महापौर फिरहाद हकीम शामिल हैं।

यह याचिका स्पीकर रथेंद्र बोस के खिलाफ निर्णय न लेने के लिए दायर की गई है, जिसमें 10 बागी विधायकों को प्रतिवादी बनाया गया है। मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होने की संभावना है।

चट्टोपाध्याय ने इस मुद्दे को लेकर दूसरी बार सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है। इसी साल सितंबर में अनुभवी विधायक ने इन 10 बागी विधायकों को बर्खास्त करने की मांग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

28 सितंबर को सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यदि पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष को ऐसा कोई आवेदन प्रस्तुत किया जाता है तो उसका निपटारा तीन महीने के भीतर किया जाना चाहिए और उम्मीद जताई कि अध्यक्ष इस समय सीमा का पालन करेंगे।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से पहला आवेदन 8 जुलाई को अध्यक्ष को प्रस्तुत किया गया था, जिससे तीन महीने की समय सीमा 8 अक्टूबर हो गई थी। हालांकि अध्यक्ष द्वारा अभी तक कोई निर्णय घोषित नहीं किए जाने के कारण इस मामले को एक बार फिर सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में लाया गया है।

रितब्रत और हकीम के अलावा, जिन अन्य बागी विधायकों की अयोग्यता की मांग की गई है, उनमें संदीपन साहा, अरूप रॉय, शिउली साहा, अख्तरुज्जमान, सबीना यास्मीन, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा और जावेद अहमद खान शामिल हैं। इसके अतिरिक्त विधानसभा के प्रधान सचिव को भी इस मामले में पक्षकार बनाया गया है। चट्टोपाध्याय दलबदल विरोधी अधिनियम के तहत विधायकों को बर्खास्त करने की मांग कर रहे हैं।

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