कोलकाता :पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए सोमवार का दिन कई मायनों में चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। एक ओर पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी और संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, वहीं दूसरी ओर टीएमसी के चर्चित नेता जहांगीर खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इन दोनों घटनाओं ने राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के सामने नए राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
विधानसभा चुनाव में अपेक्षा से कमजोर प्रदर्शन के बाद टीएमसी पहले से ही संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं के अलग होने और कानूनी मामलों में पार्टी नेताओं के फंसने से राजनीतिक दबाव और बढ़ता दिखाई दे रहा है।
सुखेंदु शेखर रॉय ने दिए थे संकेत
सुखेंदु शेखर रॉय ने अपने इस्तीफे के संकेत कुछ दिन पहले ही दे दिए थे। चार जून को उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि लोकसभा और राज्यसभा के कुछ टीएमसी सांसद पार्टी छोड़ने का फैसला कर सकते हैं। उस समय उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में चर्चा पैदा कर दी थी, लेकिन अब उन्होंने खुद सबसे पहले इस्तीफा देकर इन अटकलों को सच साबित कर दिया। रॉय लंबे समय से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते रहे हैं और संगठन के भीतर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती रही है। हाल के दिनों में उन्होंने पार्टी के अंदर बढ़ते असंतोष और नेतृत्व से जुड़े मुद्दों को लेकर भी कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की थीं।
क्या और सांसद भी छोड़ सकते हैं पार्टी?
सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में टीएमसी के कुछ और सांसद भी पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि असंतोष की स्थिति बनी रहती है, तो इसका असर संसद और संगठन दोनों स्तरों पर देखने को मिल सकता है। हाल के समय में कई नेताओं ने पार्टी की कार्यप्रणाली और आंतरिक मतभेदों को लेकर सवाल उठाए हैं। इससे विपक्ष को भी टीएमसी पर हमला करने का मौका मिल रहा है।
राज्यसभा में टीएमसी की स्थिति पर असर
पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की कुल 17 सीटें हैं। इनमें टीएमसी के पास सबसे अधिक 13 सदस्य हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के पास तीन सीटें हैं। सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे के बाद एक सीट रिक्त हो जाएगी, जिसके लिए उपचुनाव कराया जाएगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्य की बदलती परिस्थितियों और पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों का असर इस उपचुनाव पर भी पड़ सकता है। हालांकि अंतिम परिणाम राजनीतिक समीकरणों और विधायकों की संख्या पर निर्भर करेगा।
गिरफ्तार हुआ जहांगीर खान
इसी बीच टीएमसी के फायरब्रांड नेता जहांगीर खान को पुलिस ने उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के नजदीक से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, उनके खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा थाने में कई मामले दर्ज हैं, जिनमें जबरन वसूली के आरोप भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने 26 मई को उन्हें मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया। हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के स्थान और ऑपरेशन से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
फाल्टा उपचुनाव में रहा था चर्चा का केंद्र
जहांगीर खान फाल्टा विधानसभा उपचुनाव के दौरान भी काफी चर्चा में रहे थे। उन्होंने चुनाव से कुछ दिन पहले अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन नामांकन वापस लेने की समय सीमा समाप्त हो जाने के कारण उनका नाम इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में बना रहा।मतगणना के बाद वह चौथे स्थान पर रहे। चुनाव के दौरान उनके कई बयान और राजनीतिक गतिविधियां लगातार सुर्खियों में बनी रही थीं।
टीएमसी के सामने संगठनात्मक चुनौती
पिछले कुछ समय से टीएमसी के भीतर असंतोष और गुटबाजी की खबरें सामने आती रही हैं। कुछ नेताओं के अलग रुख अपनाने और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी ने पार्टी के सामने संगठनात्मक चुनौती खड़ी कर दी है। विपक्ष भी इन घटनाओं को लेकर लगातार ममता बनर्जी और उनकी पार्टी पर निशाना साध रहा है। हालांकि टीएमसी नेतृत्व की ओर से अभी तक इन घटनाओं पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी के लिए संगठन को एकजुट रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
बंगाल की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल
सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे और जहांगीर खान की गिरफ्तारी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि टीएमसी इन चुनौतियों से किस तरह निपटती है और क्या पार्टी के भीतर उठ रहे असंतोष को शांत करने में सफल हो पाती है या नहीं।