सीपीआई-एम और कांग्रेस भाजपा की 'बी टीम' हैं: तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने wमुर्शिदाबाद जिले के जलांगी में एक जनसभा आयोजित की और विपक्षी कांग्रेस और सीपीआई-एम पर तीखा हमला बोला
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोमवार को मुर्शिदाबाद जिले के जलांगी में एक जनसभा आयोजित की और विपक्षी कांग्रेस और सीपीआई-एम पर तीखा हमला बोला।
जालांगी विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल उम्मीदवार बाबर अली के समर्थन में बनर्जी ने कहा कि हमारा उम्मीदवार बहुत पारदर्शी और समर्पित है। उन्होंने सीपीआई-एम और कांग्रेस को 'भाजपा की बी टीम' बताकर मतदाताओं को चेतावनी दी।
सीपीआई-एम और कांग्रेस पर एक साथ हमला करते हुए उन्होंने कहा कि सीबीआई-एम अब बीते जमाने की बात हो गई है, और कांग्रेस को वोट देना अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा की मदद करना है। इसलिए, विकास के लिए, हमारी पार्टी के चिन्ह पर वोट दें और तृणमूल कांग्रेस को जिताएं।
उन्होंने विपक्षी खेमे के मुस्तफिजुर रहमान और यूनुस अली सरकार पर भी हमला बोला। उनके अनुसार, सीपीआई-एम के उम्मीदवार मुस्तफिजुर रहमान पर उनकी ही पार्टी के नेताओं ने हमला किया है।
बनर्जी ने कहा कि मुस्तफिजुर रहमान राणा बाबू को पार्टी के भीतर उनके नेता स्वीकार नहीं करते। 2021 में उन्हें लगभग 48,000 वोटों से हार मिली थी। उस पार्टी को वोट देकर अपना वोट बर्बाद न करें। हमारे उम्मीदवार की छवि बेदाग है। उनका जन्म 1993 में हुआ था। उन्होंने बच्चों को पढ़ाना शुरू किया और मुफ्त शिक्षा वाले स्कूल स्थापित किए। मुर्शिदाबाद समेत बंगाल के कई इलाकों में उन्होंने निस्वार्थ भाव से लोगों के हित में शिक्षा के प्रसार और प्रगति के लिए काम किया।
भाजपा पर तीखे शब्दों में हमला करते हुए बनर्जी ने कहा कि अब समय आ गया है कि उन लोगों को सबक सिखाया जाए जिन्होंने आपकी 100 दिन की मजदूरी और आवास योजना की राशि रोक रखी है। भाजपा शासित राज्य में लोगों के कोई अधिकार नहीं हैं। केवल ममता बनर्जी ही सर्वोच्च न्यायालय में आपके लिए लड़ रही हैं।
उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया के बाद बंगाल की मतदाता सूची से नाम हटाए गए लोगों को आश्वासन दिया।
उन्होंने आगे कहा कि जिनके नाम जबरन सूची से हटाए गए हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। हमारे प्रतिनिधियों से संपर्क करें, हम न्यायाधिकरण में अपील करने की व्यवस्था कर रहे हैं। भाजपा शासित राज्य में लोगों के अधिकारों के लिए कोई नहीं लड़ा। केवल ममता बनर्जी ही सर्वोच्च न्यायालय में लड़ रही हैं।