जर्मनी ने 20 साल में अपने एक तिहाई पेटेंट गंवाए, किसने जीते?

चीन की कंपनियों ने बीते सालों में बड़ी तेजी से जर्मनी के अंतरराष्ट्रीय पेटेंट पर कब्जा जमाया है. हालांकि जर्मनी के पेटेंट हथियाने वाले देशों में सबसे आगे है अमेरिका;

Update: 2026-06-05 10:57 GMT

चीन की कंपनियों ने बीते सालों में बड़ी तेजी से जर्मनी के अंतरराष्ट्रीय पेटेंट पर कब्जा जमाया है. हालांकि जर्मनी के पेटेंट हथियाने वाले देशों में सबसे आगे है अमेरिका.

जर्मनी अपने बहुत सारे पेटेंट विदेशी कंपनियों के हाथों गंवाता जा रहा है. विदेशी कंपनियां जर्मन कंपनियों को खरीदने के साथ ही उनके पेटेंट पर भी कब्जा कर रही हैं. साल 2000 से 2022 के बीच जर्मन कंपनियों ने 650,000 अंतरराष्ट्रीय पेटेंट हासिल किए थे. एक रिसर्च से पता चला है कि इनमें से लगभग 29 फीसदी यानी 189,000 पेटेंट जर्मनी के हाथों से निकल कर विदेशी कंपनियों के पास चले गए हैं. इनमें से 33 फीसदी पेटेंट अमेरिका और 11 फीसदी पेटेंट स्विट्जरलैंड की कंपनियों ने हासिल कर लिए हैं.

जर्मनी की बेर्टेल्समान फाउंडेशन की तरफ से इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक रिसर्च (आईडब्ल्यू) ने यह रिसर्च किया है. रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, "जर्मनी के ज्यादातर पेटेंट पर अमेरिका का नियंत्रण है लेकिन अब चीन भी इन पर नियंत्रण करने वाले प्रमुख समूह में शामिल हो गया है."

शून्य से 11,300 पेटेंट तक पहुंचा चीन

आईडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक जर्मनी में विकसित करीब 11,300 पेटेंट अब चीन की कंपनियों के पास हैं. 21वीं सदी की शुरुआत में इनमें से एक भी पेटेंट चीन के पास नहीं था. चीन की सरकारी कंपनियां जर्मन कंपनियों को खरीद कर उनके पेटेंट अपने कब्जे में कर रही हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, "मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्यों को देखते हुए दोनों परिस्थितियों पर बारीकी से नजर रखना बेहद जरूरी है."

रिपोर्ट में जर्मनी को यह सलाह भी दी गई है कि संबंधित क्षेत्रों में ज्यादा तकनीकी स्वतंत्रता के लिए प्रयास करना चाहिए. रिसर्च रिपोर्ट के सहलेखक ओलिवर कॉपेल का कहना है, "जर्मन कॉर्पोरेशन का भी देश के बाहर के पेटेंट पर नियंत्रण है. यह सामान्य प्रतियोगिता का हिस्सा है." हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चीन भूरणनीति के आधार पर पश्चिमी देशों में अधिग्रहण कर रहा है, इसके साथ ही वह अपने बाजार को विदेशी निवेशकों के लिए बंद कर रहा है.

रिसर्च में निवेश के मामले में पिछड़ा जर्मनी

रिपोर्ट में जर्मनी को सलाह दी गई है कि वह शोध में ज्यादा निवेश करे जिससे देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ने से बच सके. इंस्टीट्यूट के मुताबिक जर्मन अर्थव्यवस्था का वैश्विक रिसर्च और विकास में खर्च बीते सालों में काफी कम हुआ है. वैश्विक बाजार में अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए किए जाने वाले आवेदनों में जर्मनी की हिस्सेदारी साल 2000 में 22 फीसदी थी, जो 2022 में घट कर 15 फीसदी पर आ गई.

शोध और विकास में जर्मनी के निवेश का कम होना इसका प्रमुख कारण है. साल 2000 में जर्मनी सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देशों में तीसरे नंबर पर था. उस वक्त वह चीन की तुलना में दोगुना निवेश कर रहा था. रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक तबसे अब तक चीन ने अपना खर्च 20 गुना बढ़ा लिया है. इसी दौर में जर्मनी खिसक कर अब छठे नंबर पर पहुंच गया है.

मेकैनिकल इंजीनियरिंग में जबर्दस्त होड़

रिसर्च में जिन 13 औद्योगिक क्षेत्रों की पड़ताल की गई उनमें सिर्फ मेकैनिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ही जर्मनी की स्थिति सकारात्मक है. इस क्षेत्र में पेटेंट के लिए साल 2000 में 3,300 आवेदन किए गए गए थे. 2022 में इनकी संख्या बढ़ कर 4,300 पर पहुंच गई. हालांकि इसी क्षेत्र में चीन भी अपनी तरफ से पूरा जोर लगा रहा है. कई जर्मन कंपनियों का अधिग्रहण इसकी मिसाल हैं.

रिसर्च एजेंसी ने यह विश्लेषण पेटेंट के डाटाबेस के आधार पर किया है. इसमें अंतरराष्ट्रीय पेटेंट पर नजर रखी जाती है. ये ऐसे पेटेंट हैं जो कई देशों के लिए एक साथ हासिल किए जाते हैं. पेटेंट के आवेदन की जानकारी 18 महीने तक नहीं दी जाती है. 2022 सबसे करीब का साल है जिसके लिए जानकारी फिलहाल मौजूद है.

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