उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 19 आईएएस और 10 पीसीएस अधिकारियों के तबादले
उत्तराखंड शासन में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल सामने आया है। राज्य सरकार ने बड़ा आदेश जारी करते हुए 19 आईएएस और 10 पीसीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए;
देहरादून। उत्तराखंड शासन में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल सामने आया है। राज्य सरकार ने बड़ा आदेश जारी करते हुए 19 आईएएस और 10 पीसीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए। सरकार का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक दुरुस्त और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
इस फेरबदल में कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई अहम जिम्मेदारियां मिली हैं। आईएएस अधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम से मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड, पशुपालन, मत्स्य और दुग्ध विकास विभाग की जिम्मेदारी के साथ उन्हें उच्च शिक्षा विभाग का सचिव बनाया गया है। वहीं डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा को तकनीकी शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग से उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी हटा दी गई है।
आईएएस विनय शंकर पांडे को नागरिक उड्डयन, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग का सचिव बनाया गया है। उनके पास स्वास्थ्य आयुक्त और यूके हेल्थ सिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी भी रहेगी।
देहरादून के जिलाधिकारी और स्मार्ट सिटी के सीईओ सविन बंसल को अब सचिव नियोजन की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। वहीं आईएएस आशीष चौहान को बड़ा दायित्व देते हुए देहरादून का जिलाधिकारी और स्मार्ट सिटी सीईओ बनाया गया है।
संजय कुमार को हल्द्वानी के समाज कल्याण निदेशक बनाया गया है, जबकि आईएएस नमामि बंसल को विद्यालयी शिक्षा विभाग में अपर सचिव की जिम्मेदारी मिली है। संदीप तिवारी को मिशन एनएचएम निदेशक और एमडी जीएमवीएन बनाया गया है। वहीं दीप्ति सिंह को अल्पसंख्यक कल्याण और खेल विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके अलावा अपूर्वा पांडे को बागेश्वर का जिलाधिकारी बनाया गया है, जबकि आकांक्षा कोंडे को विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक की जिम्मेदारी मिली है।
पीसीएस अधिकारियों में भी बड़े स्तर पर बदलाव किए गए हैं। गिरधारी सिंह रावत को सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में अपर सचिव बनाया गया है। इलागिरि को दुग्ध और महिला डेयरी विकास निदेशक की जिम्मेदारी मिली है।
हरिद्वार, पौड़ी, नैनीताल और चंपावत समेत कई जिलों में डिप्टी कलेक्टर और एडीएम स्तर पर भी तबादले किए गए हैं। सरकार के इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल को आगामी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों को गति देने के तौर पर देखा जा रहा है।