नौतपा में झुलसता यूपी: बांदा 46.2 डिग्री पर

पूरे प्रदेश में ही नहीं देश में इस बार गर्मी ने एक रिकॉर्ड स्थापित कर लिया है, वहीं उत्तर प्रदेश का बांदा जिला सभी रिकॉर्ड को पार करता हुआ 46.2 डिग्री सेल्सियस ताप तक पहुंच गया है यूपी में तीखी धूप, गर्मी बढ़ते तापमान और लू के थपेड़ों से जनजीवन बेहाल हो गया है;

By :  Deshbandhu
Update: 2026-05-25 18:19 GMT

लू का रेड अलर्ट: घर से बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं

  • सीएम योगी का आदेश: लाउडस्पीकर से अलर्ट जारी करें
  • जलवायु परिवर्तन का असर: फसलें, नदियाँ और जीवन संकट में
  • विशेषज्ञों की चेतावनी: हरियाली और जल संरक्षण ही बचाएगा

मेरठ। पूरे प्रदेश में ही नहीं देश में इस बार गर्मी ने एक रिकॉर्ड स्थापित कर लिया है, वहीं उत्तर प्रदेश का बांदा जिला सभी रिकॉर्ड को पार करता हुआ 46.2 डिग्री सेल्सियस ताप तक पहुंच गया है यूपी में तीखी धूप, गर्मी बढ़ते तापमान और लू के थपेड़ों से जनजीवन बेहाल हो गया है जिसके कारण पशु पक्षी भी परेशान हो गए हैं। आकाश से सूरज की। बरस रही गर्मी के कारण लोगों को घर में छिपे रहने के लिए मजबूर कर दिया है।

नौतपा के कारण आगामी दिनों में यह गर्मी और परेशान कर सकती है।31 मई के बाद कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है प्रदेश में लू से कुछ दिन और अभी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। दिन में तपिश रहेगी तो रातें भी गर्म होंगी। मौसम विभाग ने कुछ जिलों में लू के रेड अलर्ट के साथ दिन में बाहर न निकलने की सलाह दी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मौसम व आपदा को लेकर लाउडस्पीकर से भी अलर्ट जारी किया जाए।

उन्होंने राज्य में मौसम संबंधी पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक सटीक, त्वरित व जनकेंद्रित बनाने के निर्देश जारी किए हैं। पल पल बदलता मौसम हमें डरा रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण ही भीषण गर्मी और बाढ़ जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।

इससे निपटने के लिए चाहे पौधारोपण हो या जल संरक्षण कदम हमें उठाने ही होंगे, सोसाइटी ऑफ ग्रीन वर्ड 4 सस्टेनेबल एनवायरनमेंट के सेक्रेटरी डॉक्टर आरएस सेंगर ने कहा कि इस भीषण गर्मी से निपटने के लिए हमें लोगों के बीच जाकर जागरूकता अभियान चलाने होंगे नहीं तो इस जलवायु परिवर्तन से आने वाले दशकों में हमारे जीवन के सभी क्षेत्रों में प्रभाव पड़ेगा। यह केवल तापमान बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी पूरी श्रृंखला प्रकृति और मानव समाज को बदलकर रख देगी।

आगामी दिनों में यदि अलनीनो की स्थिति और मजबूत होती है तो इसका असर भारत पर भी मुख्य रूप से पड़ेगा।इस कारण भीषण गर्मी हिट वेव की आवृत्ति अधिक तीव्रता से बढ़ेगी, साथ ही अत्यधिक वर्षा और सूखे के साथ कुछ क्षेत्रों में विनाशकारी बाढ़ की संभावनाएं भी बढ़ेगी तो कुछ क्षेत्रों में सूखे का सामना करना पड़ेगा। डॉ आरएस सेंगर ने बताया कि यदि यही हाल रहा तो फसलों की पैदावार में कमी, तापमान में बदलाव और अनियमित मानसून के कारण धान, गेहूं, मक्का, गन्ना जैसे मुकसलों में गिरावट आने की संभावना बनेगी। यही नहीं, जलवायु परिवर्तन से ग्लेशियर पिघलेंगे, जिससे नदियों में बाढ़ आएगी वहीं नदियां भविष्य में सूख भी सकती हैं और केवल बरसाती नदी बनकर रह जाएगी।यह भविष्य के जल संकट को गहरा सकता है।साथ ही, जैव विविधता पर भी इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।

डॉ आरएस सेंगर ने कहा कि अभी समय है कि हमें यदि इस संकट से बचना है तो स्वयं जागरूक होना पड़ेगा, फिर चाहे वह पौधों या जल संरक्षण हमें भी अपनी भूमिका निर्धारित करनी होगी, साथ ही विश्व को एक मंच पर आकर जलवायु परिवर्तन के प्रति अपनी भूमिका कड़े कानूनों को बनाकर उनके साथ निभानी होगी यदि समय पर ऐसा नहीं किया गया तो निश्चित रूप से भविष्य की स्थिति और भी डरावनी हो सकती है।

डॉ आरएस सेंगर ने बताया कि हम लोगों को हरियाली बढ़ाने और जल निकायों को पुनर्जीवित करने के लिए प्रयास करना होगा।कंक्रीटीकरण को कम करके बहुमंजिला बिल्डरों में वर्टिकल गार्डनिंग करने से भी शहरों में तापमान कम करने में मदद मिल सकती है।गर्मी के अवशोषण को कम करने के लिए सुव्यवस्थित और संरचनात्मक तरीके को लागू करना होगा। हर शहर में हीट एक्शन प्लान बनाना होगा।

लेकिन समस्या यह है कि हम ऐसे प्लान को प्रतिक्रिया के तौर पर बनाते हैं और इस पर काम करते हैं जैसे जब लू चलती है तो हम इस पर चर्चा करने लगते हैं और इससे लोगों को कैसे राहत दें, लेकिन हमें ऐसे समाधान की जरूरत है जो सिस्टम में पहले से शामिल हो जिससे हम गर्मी को कम कर सकें। इसके लिए नए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाते समय ही ऐसे उपाय करने चाहिए जिससे वह गर्मी को कम कर सकें।

शहरों में पेड़ लगाकर छाया को अधिक से अधिक कैसे बढ़ाया जाए, इस पर कार्य करना होगा। निर्माण करते समय ऐसे मैटीरियल का इस्तेमाल हो जो गर्मी कम अवशोषित करें। गरमी की समस्या से निपटने के लिए काफी उपाय है।

लेकिन हमें देखना होगा कि इन उपायों को कैसे लागू किया जा सकता है, एक सबसे बड़ी समस्या गरीबों और वंचित तबके के लोगों के लिए है, गर्मी से उनका जीवन सबसे अधिक प्रभावित होता है। इस तबके के लोगों को राहत देने के लिए कम्युनिटी स्तर पर कार्यक्रम बनाकर उनको लागू किया जाना चाहिए जहां मजदूर और श्रमिक काम करते हैं वहां छाया की व्यवस्था करना चाहिए जिससे कि उनका गर्मी से एक्सपोजर कम से कम हो सके।ऐसा ही एक उपाय है।

स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाना भी बहुत जरूरी है क्योंकि अत्यधिक गर्मी के कारण काफी बीमारियाँ बढ़ जाती हैं। इसलिए जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रहे तापमान को ध्यान में रखते हुए क्लाइमेट रिजीलेंस यानी की जलवायु अनुकूलन के संकेत को अपनाना चाहिए और उसके लिए कार्यक्रम चलाकर समय पर धरातल पर उतारने की आवश्यकता है।

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