पीलीभीत में ‘करोड़पति चपरासी’ का खुलासा: 53 खातों में संदिग्ध लेनदेन, 5.28 करोड़ रुपये फ्रीज

बीसलपुर के जनता इंटर कॉलेज में चपरासी पद पर तैनात इल्हाम शम्सी को करीब सात वर्ष पहले डीआईओएस कार्यालय से संबद्ध किया गया था। यहां वह क्लर्क की तरह काम करने लगा और इसी दौरान उसने वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया।;

Update: 2026-04-15 05:52 GMT
पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय से जुड़ा एक चपरासी करोड़ों के गबन के मामले में जांच के घेरे में है। इल्हाम उर रहमान शम्सी नामक इस कर्मचारी के खिलाफ चल रही जांच में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस और जांच एजेंसियों ने अब तक उसके 53 बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन का पता लगाया है, जिनमें जमा 5.28 करोड़ रुपये फ्रीज किए जा चुके हैं।

चपरासी से ‘क्लर्क’ बनकर किया खेल

बीसलपुर के जनता इंटर कॉलेज में चपरासी पद पर तैनात इल्हाम शम्सी को करीब सात वर्ष पहले डीआईओएस कार्यालय से संबद्ध किया गया था। यहां वह क्लर्क की तरह काम करने लगा और इसी दौरान उसने वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया। जांच में सामने आया है कि उसने सरकारी वेतन भुगतान प्रणाली का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से बड़ी रकम अपने और अपने करीबियों के खातों में ट्रांसफर कराई।

पत्नी के खाते में 1.02 करोड़ का ट्रांसफर

मामले का खुलासा तब हुआ जब पिछले साल इल्हाम ने अपनी पत्नी अर्शी खातून के नाम पर बैंक खाता खुलवाया और कोषागार से वेतन के नाम पर 1.02 करोड़ रुपये उस खाते में ट्रांसफर कर दिए। बैंक ऑफ बड़ौदा को इस लेनदेन पर संदेह हुआ, जिसके बाद उसने प्रशासन को सूचना दी। जनवरी में मामला उजागर होने पर इल्हाम और उसकी पत्नी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

53 बैंक खातों की जांच

जांच के दौरान पुलिस ने इल्हाम से जुड़े 53 बैंक खातों की पहचान की, जिनमें भारी मात्रा में संदिग्ध लेनदेन पाया गया। इन खातों में जमा कुल 5.28 करोड़ रुपये को फ्रीज कर दिया गया है। जांच एजेंसियों ने वर्ष 2014 से 2026 तक जिले के 35 राजकीय इंटर कॉलेज और हाईस्कूल तथा 22 सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में कार्यरत कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड खंगाला है। इसमें कर्मचारियों की संख्या, नाम और बैंक खातों का मिलान किया जा रहा है, ताकि गड़बड़ी की पूरी तस्वीर सामने आ सके।

तीन पत्नियां, कई खातों में निवेश

इल्हाम शम्सी के निजी जीवन से जुड़े पहलू भी जांच में सामने आए हैं। उसकी तीन पत्नियां हैं, जिनके खातों का इस्तेमाल भी कथित रूप से वित्तीय लेनदेन के लिए किया गया। पहली पत्नी अर्शी खातून के खाते में 33.30 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराई गई। दूसरी पत्नी अजरा, जो बुलंदशहर में रहती है, उसके खाते में 25 लाख रुपये की एफडी पाई गई। तीसरी पत्नी लुबना, जो संभल में रहती है, उसके खाते में अब तक किसी संदिग्ध लेनदेन की पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा एक रिश्तेदार तहसीन जहां के खाते में 70,444 रुपये की एफडी भी कराई गई थी।

बिल्डरों के खातों में भी ट्रांसफर

जांच में यह भी सामने आया है कि इल्हाम ने अपनी पत्नी अर्शी के खाते से बड़ी रकम बिल्डरों को ट्रांसफर की। जेएचएम इंफ्रा होम प्राइवेट लिमिटेड, बरेली के खाते में 90 लाख रुपये, ओरिका होम्स के खाते में 17.18 लाख रुपये ट्रांसफर किए। पुलिस ने दोनों कंपनियों को नोटिस जारी कर दिया है और निर्देश दिए हैं कि इस रकम से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न की जाए।

जांच के लिए बनाई गई विशेष टीम

इस पूरे मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया गया है। पुलिस अधीक्षक (एसपी) सुकीर्ति माधव ने बताया कि मामले की सघन जांच के निर्देश दिए गए हैं और हर पहलू पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं लग रहा, बल्कि इसमें एक बड़े स्तर की अनियमितता और सिस्टम की खामियों का भी संकेत मिलता है।

आगे की जांच और संभावित खुलासे

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इल्हाम ने यह गबन अकेले किया या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि सरकारी तंत्र में कहां-कहां चूक हुई, जिससे इतने लंबे समय तक यह घोटाला चलता रहा। फिलहाल, फ्रीज किए गए खातों और बरामद दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह मामला न केवल एक बड़े वित्तीय घोटाले को उजागर करता है, बल्कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और निगरानी की जरूरत पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

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