यूपी ट्रेड शो : बागपत का घेवर, शामली की पलंग तोड़ पेड़ा-बर्फी बनीं लोगों की पसंद

इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों और मिठाइयों का स्वाद देश-विदेश से आए लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। इस बार पहली बार वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रसिद्ध व्यंजनों को ट्रेड शो में स्थान दिया गया है।;

Update: 2026-09-28 06:16 GMT

ग्रेटर नोएडा। इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों और मिठाइयों का स्वाद देश-विदेश से आए लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। इस बार पहली बार वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रसिद्ध व्यंजनों को ट्रेड शो में स्थान दिया गया है।

इसी क्रम में बागपत का पारंपरिक घेवर और शामली की प्रसिद्ध पलंग तोड़ बर्फी व पेड़ा लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। 'वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन' के पवेलियन में बागपत के स्टाल पर पहुंच रहे लोग न केवल घेवर का स्वाद ले रहे हैं, बल्कि इसे तैयार होते हुए भी देख रहे हैं। स्टाल पर पांच कारीगर लोगों के सामने ताजा घेवर तैयार कर रहे हैं। घेवर बनते देखने के बाद लोग इसकी कुरकुराहट और ऊपर जमी खोये की परत का स्वाद चख रहे हैं। दिल्ली, गुरुग्राम और गाजियाबाद से ट्रेड शो में पहुंचे कई लोगों ने बागपत के घेवर को पसंद किया।

बागपत के अमीनगर सराय निवासी ईश्वर दयाल अग्रवाल के परिवार में तीन पीढ़ियों से घेवर बनाने का कारोबार हो रहा है। परिवार से जुड़े दीपक गोयल ट्रेड शो में स्टाल का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई लोग स्टाल पर पहुंचकर यह सवाल करते हैं कि घेवर तो आमतौर पर सावन के मौसम में मिलने वाली मिठाई है, फिर सितंबर में इसकी बिक्री कैसे हो रही है। उन्होंने बताया कि बागपत में घेवर की मांग केवल सावन तक सीमित नहीं है। अब लोग वर्ष के अलग-अलग समय में भी इसकी मांग करते हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को बागपत के घेवर की उपलब्धता की जानकारी मिल रही है।

दीपक गोयल के मुताबिक, ट्रेड शो में घेवर की रोजाना अच्छी बिक्री हो रही है। इसकी कीमत करीब 600 रुपये प्रति किलो रखी गई है। उन्होंने बताया कि शुद्ध दूध से तैयार खोये का इस्तेमाल घेवर को अलग स्वाद देता है। नीचे का कुरकुरा हिस्सा और ऊपर की खोये की परत इसकी प्रमुख विशेषता है। बागपत के अलावा दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी इसकी मांग रहती है। ट्रेड शो में दिल्ली की सोनाली, गुरुग्राम की रवीना कश्यप और गाजियाबाद के धर्मेंद्र भारद्वाज समेत कई लोगों ने घेवर का स्वाद लिया। लोगों ने स्टाल पर रुककर इसे तैयार करने की पारंपरिक प्रक्रिया भी देखी। खास तरीके से घेवर तैयार होते देखना भी उनके लिए आकर्षण का विषय रहा।

वहीं, शामली के साधु स्वीट्स की पलंग तोड़ बर्फी और पलंग तोड़ पेड़ा भी ट्रेड शो में लोगों की पसंद बन रहे हैं। साधु स्वीट्स के मालिक राकेश गर्ग ने बताया कि ट्रेड शो के पहले दिन से ही उनके स्टाल पर ग्राहकों की भीड़ पहुंच रही है। स्टाल पर कई तरह की मिठाइयां उपलब्ध हैं, लेकिन पलंग तोड़ बर्फी और पलंग तोड़ पेड़ा को लोग विशेष रूप से पसंद कर रहे हैं। राकेश गर्ग के मुताबिक ट्रेड शो के जरिए शामली की पारंपरिक मिठाइयों को देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों के साथ-साथ विदेशी मेहमानों तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि ट्रेड शो के हाल नंबर 17 में वियतनाम, रूस, बेलारूस और ऑस्ट्रिया से आए विदेशी व्यापारी भी ठहरे हैं। ये विदेशी मेहमान भारतीय मिठाइयों और पारंपरिक व्यंजनों में रुचि दिखा रहे हैं और शामली की पलंग तोड़ बर्फी व पेड़े का स्वाद भी ले रहे हैं। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में इस तरह प्रदेश के अलग-अलग जिलों के पारंपरिक खाद्य उत्पादों को एक मंच मिलने से स्थानीय कारीगरों और मिठाई कारोबारियों को नए ग्राहकों तक पहुंचने का मौका मिल रहा है।

बागपत का घेवर और शामली की पलंग तोड़ मिठाइयां इसकी मिसाल बनकर सामने आई हैं। ट्रेड शो में आने वाले लोग जहां इन पारंपरिक स्वादों से रूबरू हो रहे हैं, वहीं कारोबारियों को भी नए बाजार और देश-विदेश के ग्राहकों तक पहुंच बनाने का अवसर मिल रहा है।


Tags:    

Similar News