यूपी कांग्रेस में पदभार ग्रहण समारोह के दौरान हंगामा, आराधना मिश्रा और अजय राय के समर्थकों में चले जूते-चप्पल

बताया जा रहा है कि अजय राय के समर्थक उनके समर्थन में नारे लगा रहे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों ओर से गाली-गलौज होने लगी। इसके बाद स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कार्यकर्ताओं के बीच जूते-चप्पल चलने लगे।;

Update: 2026-10-11 10:55 GMT

लखनऊ: उत्तर प्रदेश कांग्रेस में रविवार को प्रदेश अध्यक्ष के पदभार ग्रहण कार्यक्रम के दौरान जमकर हंगामा हुआ। लखनऊ स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में नवनियुक्त अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच उनके समर्थकों और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के समर्थकों के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते कहासुनी ने झड़प का रूप ले लिया और दोनों पक्षों के बीच जूते-चप्पल चलने लगे। घटना के बाद अजय राय अपने समर्थकों के साथ पार्टी कार्यालय में धरने पर बैठ गए। उन्होंने मोना के समर्थक ममता चौधरी पर बदसलूकी करने का आरोप लगाया। इस घटनाक्रम से प्रदेश कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और आपसी मतभेद एक बार फिर सामने आ गए हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कैसे शुरू हुआ विवाद?

जानकारी के मुताबिक, लखनऊ स्थित कांग्रेस कार्यालय में रविवार को आराधना मिश्रा मोना की प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। इस दौरान पार्टी के कई कार्यकर्ता और समर्थक उनसे मिलने पहुंच रहे थे। इसी बीच पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी अपने समर्थकों के साथ कार्यालय पहुंचे। बताया जा रहा है कि अजय राय के समर्थक उनके समर्थन में नारे लगा रहे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों ओर से गाली-गलौज होने लगी। इसके बाद स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कार्यकर्ताओं के बीच जूते-चप्पल चलने लगे। पार्टी कार्यालय में हुए इस हंगामे से वहां मौजूद कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पदभार ग्रहण जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान हुई इस घटना ने कांग्रेस संगठन की कार्यप्रणाली और नेताओं के बीच तालमेल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अजय राय धरने पर बैठे, समर्थकों में नाराजगी

हंगामे के बाद पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय पार्टी कार्यालय में ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि आराधना मिश्रा मोना के समर्थक ममता चौधरी ने उनके साथ बदसलूकी की। इस घटना के बाद अजय राय और उनके समर्थकों में नाराजगी देखी गई। कुछ देर बाद अजय राय कार्यालय से बाहर निकल आए। हालांकि, मौके पर मौजूद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं प्रमोद तिवारी और इमरान मसूद सहित अन्य नेताओं ने उन्हें समझाने की कोशिश की। वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद अजय राय को वापस कार्यालय के भीतर ले जाया गया। इस घटनाक्रम ने प्रदेश कांग्रेस के भीतर नेताओं और उनके समर्थकों के बीच बढ़ते तनाव को उजागर कर दिया। हालांकि, विवाद की शुरुआत किस बात से हुई और दोनों पक्षों के बीच किस तरह की बातचीत हुई, इस बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

हंगामे के बीच मोना और इमरान मसूद ने संभाला कार्यभार

पार्टी कार्यालय में विवाद के बावजूद प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने अपना कार्यभार ग्रहण किया। इमरान मसूद ने भी कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इस अवसर पर कांग्रेस के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यभार ग्रहण समारोह के दौरान हुई झड़प ने कार्यक्रम की राजनीतिक अहमियत के साथ-साथ संगठन के अंदरूनी मतभेदों को भी चर्चा में ला दिया। पार्टी नेतृत्व के सामने अब संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने की चुनौती होगी।

सपा के साथ गठबंधन पर क्या बोलीं आराधना मिश्रा?

कार्यभार संभालने के बाद आराधना मिश्रा मोना ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों का इंडिया गठबंधन राष्ट्रीय स्तर पर बना है और उत्तर प्रदेश में आगे की रणनीति को लेकर अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व करेगा। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में गठबंधन की दिशा और आगामी राजनीतिक रणनीति पर निर्णय पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर लिया जाएगा। हालांकि, प्रदेश कार्यालय में हुए हंगामे के कारण संगठन की एकजुटता का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है।

कांग्रेस के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती

प्रदेश अध्यक्ष के पदभार ग्रहण समारोह में हुई झड़प कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाली घटना है। एक ओर पार्टी को उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने और विपक्षी गठबंधन के साथ रणनीति बनाने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर संगठन के भीतर मतभेदों को दूर करना भी अहम होगा। अजय राय के समर्थकों की नाराजगी और वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद अब सबकी नजर पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर रहेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस इस विवाद को किस तरह सुलझाती है और प्रदेश संगठन में समन्वय स्थापित करने के लिए क्या कदम उठाती है।

Tags:    

Similar News